MA 1 – स्वागत – Class 1

07 सितम्बर 2011

आज आपके साथ मेरी पहली कक्षा थी,खुशी हुई मिलकर.

आशा है कि आप लोगों के सहयोग से इस मोड्यूल के माध्यम से दोनों ओर ज्ञान की  वृद्धि होगी.

मुझे दुख हुआ कि हमारी पहली कक्षा में ही काफी लोग अनुपस्थित रहे. कक्षा के दिन को लेकर कुछ विकल्प दिए है, कृपया शनीवार तक मुझे सूचित करें.

रही मॉड्यूल की बात, तो बाद में आपको module information sheet दूँगा. आज के लिए, हमने भारतीय संदर्भ में राष्ट्रीयता के उदय, उसके कारणों व प्रवृत्तियों पर एक सामान्य व्याख्यान दिया. अगली बार से आप तैयारी के साथ आएँगे और मेरी अपेक्षाएँ हैं कि कक्षा अधिक interactive हो.. यह बात कुछ और है कि आप थके हुए नौकरी से एम जी आई में आते है, परंतु ध्यान रहें यह काम न करने के लिए बहाना न बनें.

आपकी प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में..अगले सप्ताह तक ..

विनय गुदारी

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

4 Responses to MA 1 – स्वागत – Class 1

  1. Diksha Raumessur says:

    For a start its was not too good bt lets hope this will change….

    thats was interesting and quite innovative. I was able to know the meaning of a word that seems easy bt difficult to get the definition(translation) the right meaning and its source.
    for a start that was quite a brainstorming session.

    • आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद, देखते है कि कैसे इसे बेहतर बनाया जाए …
      शुभकामनाएँ
      विनय

      • karishma BUNDHUN says:

        भारत का स्वतंत्रता संग्राम के बारे में पहली बार पता चला और कैसे अंग्रेज़ों ने भारतीय पर अत्याचार किये..
        सन 1850 या 1857 का समय भारत में अंग्रेज़ी का प्रभुत्व का समय था. यह युग केवल व्यापार के लिये विदेशियों के शोषण मात्र का समय नहीं था. अंग्रेज़ सरकार के भारत के जमने , यहॉ के समाज को अपने दंग में करने और यहॉ की संस्क्रिति को विकृत करते प्रस्तुत करने का प्रयास था. इसके साथ ही भारतवसियों के जागरुक होने का, अंग्रेज़ों के मन्तव्य को समझने का,अपने देश की स्वतंत्रता की कामना करने का भी सूत्रपात करने वाला युग भी था.

        ब्रिटिश लोग आये और उन्होंने लगभग 200 साल तक भारत पर शासन किया. साथ ही साथ इस युग में साहित्य के द्वारा समाज में गहरा प्रभाव हुआ. भारतेंदु युग के कवियों की वाणी में राजनैतिक जागरुक्ता मिलती है. अंग्रेज़ी भाषा और सभ्यता के प्रभाव से भी उन्में स्वतंत्रता की भावना जाग्रित हुयी और वे अपने देश की दुरव्यवस्था की और ध्यान देने लगे. अंग्रेज़ी राज के प्रभाव में होते हुये भी भारतेंदु युग के कवियों ने अपने प्रेम का परिचय दिया है. इसका सबसे बडा प्रमण अपने देश की सम्पति और देश की जंता के प्रति जागरुक्ता है.

        परुंतु आज के दौड में समाज इतना बदल गया है और विकसित हो गया है कि मनुश्य की सोच कुछ हद तक संकुचित हो गया है कि उनके मन में राष्ट्र भाव नहीं रहा कि आगे चलकर अपने देश के लिये कुछ करें.

        सितम्बर 1920 से फरवरी 1922 के बीच महात्मा गांधी तथा भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में असह्योग आंदोलन चलाया गया, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नयी जग्रिति प्रदान की. जलियांवाला बाग नर सनहार सहित अनेक घट्नओं के बाद गांधी जी ने अनुभव किया कि ब्रितिश हाथों में एक उचित न्याय मिलने कि कोई सम्भावना नहीं है इसिलिये उन्होंने ब्रिटिश सरकार के राष्ट्र के सह्योग को वापस लेने की योजना बनायी और इस प्रकार असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गयी. यह आंदोलन अत्यंत सफल रहा, क्योंकि लखों भारतीयों का प्रोत्सह्न मिला. इस आंदोलन से ब्रिटिश प्राधिकारि हिल गये.

  2. teesna etwaru says:

    the class of today was interesting as we learned the meaning of samantavaad and what events took place in the 1857 in india, guruji told how man is associated with society and discussed a bit on women empowerment………..

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