MA 1 – Class 2

Monday 12 Sept 2011

प्रिय दोस्तो,

नमस्कार.

कक्षा में आज आपको बड़ी संख्या में देखकर अच्छा लगा. आपको 1857 से लेकर 1947 तक की सभी परिस्थितियों से अवगत कराने की चेष्टा की. आपको आभास हो गया होगा कि यह मॉड्यूल अपने आप  में कितनी गंभीरता की अपेक्षा रखता है. साथ ही, अपनी ओर से आपकी तैयारी सतत रूप से चलनी चाहिए.

भारतीय संदर्भ में स्वतंत्रता विद्रोह के कुछ मूल कारणों पर भी प्रकाश डाला गया.

स्वतंत्रता की अवधारणा का विश्लेषण करते हुए, स्वतंत्रता का संबंध प्रकृति और संतुलन के साथ जोड़ा गया जिसमें विघटन के होने से हलचल मच जाती है.

1857 के बाद तत्कालीन सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि परिवेशों की मूल प्रवृत्तियों की चर्चा की गई जिन्हें बाद में विस्तार से समझाया जाएगा.

आज के लिए इतना ही..

आपकी प्रतिक्रियाओं  की प्रतीक्षा में..

विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

7 Responses to MA 1 – Class 2

  1. vinaye says:

    कल की कक्षा में आप ने विस्तार पूर्वक यह समझा दिया कि आप के साथ इस मॉड्यूल में हम क्या पढनेवाले हैं । इस प्रकार यह स्पष्ट हो गया कि हमें किस दिशा में जाना है । आपने बहुत ही आकषिॅत ढ़ग से भारतीय परिवेश से संबंधित स्वतंत्रता, परतंत्रता आदि बातों को हमारे समक्ष रखा जिससे यह गंभीर विषय बोझिल न होकर रुचिकर रहा।

  2. vinaye08 says:

    स्वतन्त्रता आनदोलन के अंतर्गत आपने यह समझाने की चेष्टा की कि भारतीय समाज की परिस्थितियाँ राजनीति, धर्मं, संस्कृति, साहित्य और समाज से जुडी हुई हैं तथा इसके अंतर्गत आपने राजनैतिक स्तर पर समझाया कि किस प्रकार भारतीय राजाओं ने अंग्रेजों के प्रति अपने आप को समर्पित कर लिया था ताकि उन्हें सत्ता की प्राप्ति हो. जब जनता को यह बात पता चला तब उनके भीतर विद्रोह की लहर उत्पन्न हुई फिर वे युद्धभूमि पर उतर आये क्योंकि कोई भी व्यक्ति परतंत्र होकर जीना नहीं चाहता और उस समय नारी को भी अपनी वाणी उठाने का कोई अधिकार नहीं था और इसका एकमात्र कारण था निरक्षरता और गरीबी.
    इसके अतिरिक्त आपने समझाया किस तरह महात्मा गांधी जी ने भारत देश को स्वतन्त्रता दिलाई, उन्होंने धार्मिक अंधविश्वास को त्यागने का प्रसार प्रचार किया एवं जातीय विभिनिकरण को निकालने का प्रयत्न भी किया व भक्तिकाल में लोगों ने देश की शान्ति को कायम करने के लिए भगवन की आराधना की.
    उस समय भारतीय समाज में बाल विवाह, वर्णव्यवस्था , सीता प्रथा जैसी बुराइयाँ पाई जाती थीं व इसी कारण देश के चारों ओर निराशा का पतन छाया हुआ था क्योंकि उन्हें सच्चे धर्मं के बारे में कुछ नहीं पता था और विदेशीयों के दबाव में उन्हें अंग्रेजों की इच्छानुसार अपना जीवन यापन करते थे.

  3. karishma Bundhun says:

    आपको करिशमा की और से सादर प्रणाम गुरूजी , आपके साथ फिर एक बार पढ़ने का अवसर प्राप्त करके मुझे की प्राप्ति हुई है.
    इस कक्षा में आपने स्वतंत्रता का अर्थ और परतंत्रता के बारे में हमें काफी कुछ बताया है कि मनुष्य के लिए उनके जीवन में स्वंतन्त्रता की क्या भूमिका है. साथ में, मनुष्य अपने जीवन पुराने ज़माने और आधुनिक युग कैसे व्यतीत किया है. अतः, भारत ने अपनी आज़ादी पाने के लिए बहुत कुछ सहे हैं.

    भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत 1857 में हुई थी, इसे हम 1857 की क्रान्ति के रुप में अधिक जानते है।भारत में अग्रेजों का आगमन कम्पनियों के रुप में हुआ था। उन्हांेने बादशाह से व्यापार करने की अनुमति प्राप्त की थी। ईस्ट इण्डिया कंपनी ने केवल पूरे भारत में व्यापार फ़ैला लिया था बल्कि यहाँ के व्यापार में भी दखल दिया था।धीरे-धीरे इस कंपनी ने यहाँ की स्थानीय राजनीति में दखल देना शुरुकर के भूमि पर व रियासतों पर भी कब्जा शुरु कर दिया।किसानों, मजदूरों व स्थानीय लोगों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा था। इसे देखकर ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इण्डिया कंपनी से भारत का शासन अपने हाथ में ले लिया।

    ब्रितानी व्यापारी के रूप में भारत में आए तथा उन्होंने परिस्थितियों का लाभ उठाकर भारत में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया। ईस्ट इण्डिया कम्पनी की नीति में परिवर्तन

    ब्रितानियों ने सूरत में अपनी कोठियाँ स्थापित कीं। यहाँ मुगल गवर्नर रहते थे। शिवाजी ने 1664 तथा 1670 ई. में सूरत को लूटा, जिसमें ब्रितानियों की कोठियाँ भी शामिल थीं। अब ब्रितानियों का मुगलों के संरक्षण पर से विश्वास उठ गया। उन्होंने निश्चय किया कि या तो उन्हें अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी, अन्यथा मिटना होगा। ब्रितानियों ने देखा कि आजीवन संघर्ष करने के बाद भी औरंगजेब मराठा राज्य पर अधिकार न कर सका। अब उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए एक शक्तिशाली ब्रिटिश सेना गठित करने का निश्चय किया। अब कम्पनी ने एक नयी नीति अपनाते हुए कोठियों की किलेबंदी की, नये दुर्गों का निर्माण करवाया तथा अपने अधीन क्षेत्रों पर कुछ नवीन कर लगाए। इस प्रकार कम्पनी अब क्षेत्रीय संस्था के रूप में भी विकसीत होने लगी।

    क्रांतिकारी के कारण:
    १. राजनीतिक कारण

    २.प्रशासनिक कारण

    ३.सामाजिक कारण

    ४. आर्थिक कारण

    असफ़लता के कारण

    आजादी के लिये 1857 की क्रांति में सभी वर्ग के लोगों ने अपना सहयोग दिया था परन्तु यह क्रांति विफ़ल रही। इतिहासकार इस क्रांति की विफ़लता के निम्न कारण बताते है।

    निश्चित तिथि के पूर्व क्रांति का भड़कना

    क्रांति का स्थानीय स्वरू प

    क्रांतिकारियों में प्रभावी नेता कीकमी

    निश्चित लक्ष्य का अभाव

    साधन का अभाव

    कैनिंग की उदारता

    जन साधारण का क्रांति के प्रति उदासीन होना

  4. नमस्ते गुरुजी, आपने भारत मे अग्रेजो तथा East india company की बात की थी1अग्रेज भारत मे बहुत
    सम्पति को देख कर वही बस गए इस कारण भारतीयो को बहुत कुछ सहना परा था और आपने मानव स्भ्यता की बात बहुत गहराई से समझायी थी

  5. mili aartee lochon says:

    नमस्ते गुरुजी, पहले आपको इस धन्यवाद देती हूँ कि आपने हम छात्रों के लिए यह वेबसाइट बनाया। यह हमारे लिए एक नवीन उपकरण है और आशा है कि सभी इसका लाभ उठाएँगे। आपकी पहली कक्षा के लिए मैं नहीं आ पायी थी।
    दूसरी कक्षा में आपने स्वतंत्रता आन्दोलन की एक छोटी सी पृष्ठभूमि प्रस्तुत की परन्तु मेरे लिए यह छोटी होते हुए भी बहुत ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई।
    आपने स्वतंत्रता की अच्छी व्याखया दी। स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण शब्द है। पहले आपने समझाया कि व्यक्ति से लेकर समाज तक यह महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त प्रकृति भी अपनी स्वतंत्रता चाहती है। स्वतंत्रता का पूरा सम्बन्ध संतुलन से है। स्वतंत्रता का एक अर्थ यह है जब बिना कोई दबाव से व्यक्ति, समाज या प्रकृति स्वच्छन्द होकर अपने कार्य-क्षेत्र में सक्रिय हो। उदाहरणार्थ मनुष्य ने अपने दैनिक कार्य से प्रकृति की स्वतंत्रता को भंग किया। इससे प्रकृति में हलचल हुई और अनेक प्राकृतिक प्रकोप सामने आयीं। प्रकृति मनुष्य का आंतरिक प्रतिरूप है। जिस प्रकार प्रकृति अपनी स्वतंत्रता के भंग आने पर विद्रोह करता है उसी प्रकार से जब व्यक्ति भी अपनी स्वतंत्रता के भंग होने पर विद्रोह करता है। जब अंग्रेज़ॊं ने भारतीयों को द्बाया और अनेक अत्याचार किये तब स्वाभाविक रूप से उनमें विद्रोह की भावना उत्पन्न होना था और इस कारण वे अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने लगे। भारतीयों ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता की माँग की।

  6. Teena Mohesh says:

    नमस्ते गुरुजी सादर नमन, मैं तीना आपकी दोनों कक्षाओं में उपस्थित रही हूँ. पिछले ११ सालों से मैं mgi से जुड़ी हूँ. Diploma से लेकर Ba तक मैं ने आपके साथ काम किया है. अब Ma में भी आप हमें freedom movement समझा रहे हैं. जैसे कि आपने हमें बताया कि आप अपने समस्त अनुभवों को हमारे साथ बाँटना चाहते हैं. मुझे बेहद खुशी हो रही है कि मैं आप जैसे प्राध्यापक के साथ काम कर रही हूँ. पहली कक्षा के लिए भी मैं ने एक comment भेजने का प्रयास किया था. लेकिन पता नहीं कहाँ मुझ से गलती हो गयी कि comment आप तक पहुँचा नहीं.
    आपकी दूसरी कक्षा के लिए मैं इतना बता सकती हूँ कि आपने चाहे हमें मात्र स्वतंत्रता का अर्थ समझाने का प्रयास किया हो लेकिन जिस गहराई से आप विषय में उतरे हैं वह प्रशंसनीय है.
    व्यक्ति स्वतंत्रता की अपेक्षा क्यों करता है? Well, जब व्यक्ति असंतुष्ट होता है, उसे घुटन होती है, वह विकास नहीं कर पाता है, अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में असमर्थ होता है, दासत्व को मिटाना चाहता है, तब वह क्रांति करता है. आपने प्रकृति से इस तथ्य को बहुत अच्छी तरह से तुलना करके समझाया है. Tsunami की उत्पत्ति क्यों होती है? वास्तव में जब प्रकृति के संतुलन को भंग किया जाता है तभी Tsunami जैसे प्राकृतिक प्रकोप उभरता नज़र आता है. उसी प्रकार प्रकृति मनुष्य का आंतरिक रूप होता है. अगर इस प्रकृति को भंग किया गया तो मनुष्य का स्वभाव भी भंग हो जाएगा. तो प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य का स्वभाव क्या है? मनुष्य की हमेशा यही चाह रही है कि उसपर कोई दबाव न हो, कोई बंधन न हो, वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन बखूबी तरह से कर सके. लेकिन दुर्भाग्यवश मनुष्य की यह कामना कभी पूर्ण नहीं हो पायी है. इस संसार में उसी का वर्चस्व रहता है जो सबसे ज़्यादा शक्तिशाली हो. Survival of the fittest. उदाहरण के तौर पर:
    • पुरुष का नारी पर अधिकार
    • मौर्य काल में अशोक का साम्राज्य
    • आदिकाल में राजा पृथ्वीराज चौहान का वर्चस्व
    • भक्तिकाल में विदेशी सत्ता का भारत पर शासन
    • फिर ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना
    अंत में भारतीय जनता में विद्रोह की भावना पनपती है जिसके फलस्वरूप यह दावाग्नि इतनी प्रज्जवलित हो उठती है कि भारत वर्ष को आज़ादी मिल ही जाती है. लेकिन स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए आन्दोलनों का सिलसिला जारी रहता है जिस में कई महान आत्माएँ शहीद होती गईं. हम नतमस्तक हैं उनके प्रति.
    अगली कक्षा के इंतज़ार में. नमस्ते

  7. Prabah Sobagee says:

    नमस्ते गुरुजी !
    आप को बधाई है कि आप ने हम से सम्पर्क रखने का नया ज़रिया ढ़ूढ़ा । आपने भारतीय समाज की परिस्थितियों के बारे में बात की थी। आपने साल उन्नीस सौ सैंतालीस की उस समाज को हमारे सामने प्रस्तुत किए जहां के लोग स्वतंत्र नहीं थे। Survival of fittest – Darwin’s philosophy पर भी आप ने बात की। स्वतंत्रता पर आप ने गहराई से बात की थी – प्राकृतिक स्वतंत्रता से लेकर मनुष्य की स्वतंत्रता फिर देश की स्वतंत्रता पर बात की।

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