BA Yr 1 – Class 2

Wed 14 Sept 2011, 8.30 – 10.00 (replacement class of Dr Jha)

Dear Students,

I apologise for the lateness in taking my class today.

KINDLY NOTE THAT AS FROM NEXT WEDNESDAY, I’LL BE TAKING THE CLASS AS

FROM 11.30 INSTEAD OF 8.30, AS DECIDED BY EVERYONE IN CLASS TODAY.

PLEASE NOTE IT.

for today, i felt the lecture was quite intense. though i understand, you will take time  to be acquainted to teaching and learning at university level, yet you have to make    maximum efforts in this line.

साहित्य  सिद्धांत  और  साहित्यिक विधाएँ वाला मॉड्यूल अपने आप में एक कठिन विषय है. काव्यशास्त्र  हमेशा से ही ऐसा रहा परंतु आप निरुत्साहित न हों. मेरी यह कोशिश रहेगी कि मैं इस निरस विषय को समकालीन, रोचक उदाहरणों व IT के उपकरणों के माध्यम से इसे बोधगम्य बनाऊँ. इस मामले में मुझे आप लोगों के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी. सहयोग इस रूप में कि आपको सतत व निरंतर तैयारी के साथ कक्षा में आना होगा, साथ ही क्लास में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपने कार्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहें.

बहुत जल्दी आपने MIS तैयार हो जाएगा, इसे इसी ब्लॉग पर पोस्ट कर दूँगा. इस तरह से आपको हरेक कार्य के संबंध में जानकारी मिलेगी.

आज जो समझाया गया: –

साहित्य का संबंध समाज के साथ है, बहुत गहरे रूप में . इसमें कोई संदेश नहीं. “साहित्य समाज का दर्पण है” वाली प्रसिद्ध पंक्ति की पुनरालोचना की आवश्यकता है. मैं मानता हूँ कि दर्पण तो हो सकता है मगर आंशिक रूप में,. यह इसलिए क्योंकि रचनाकार अपनी कल्पनाशीलता के प्रयोग से की साहित्य की रचना करता है. जहाँ कल्पनाशीलता है, वहाँ सृजनात्मकता होती है और इस तरह से मौलिकता भी उसमें शामिल हो जाती है. साहित्य मात्र सामाजिक या किसी अन्य प्रकार की घटनाओं का आकलन नहीं है, ध्यान दीजिए. घटनाओं से जब साहित्यकार  प्रभावित होता है, तो उस मूल तत्त्व के साथ अपनी संवेदनाएँ, अपनी भावात्मकता, अपनी कल्पनाशीलता, अपने अनुभव, अपनी बौद्धिक तत्वों का समावेश करके लिखता है. परिणाम रचनाओं में ही निकलते हैं. इसलिए सृजनात्मक लेखन के लिए गहन अनुभव व समाज से जुड़े रहने की अनिवार्यता स्वयं सिद्ध है. न केवल समाज से जुड़े रहना का बल्कि उसके हर क्रिया-कलापों में भागीदार बनकर सामाजिक संवेदनाओं को आत्मसात करने से ही सफल साहित्य-रचना संभव है.

for more details, kindly do some research on this topic.

अब, आधुनिकता पर भी आज चर्चा हुई. आधुनिकता न केवल बाहरी है बल्कि आंतरिक भी है और आपको समझाया गया (उदाहरणों के साथ) कि किस प्रकार से आधुनिकता का संबंध “सवाल” करने की प्रक्रिया के साथ जुड़ा हुआ है. सवाल करना? कैसे? अंधविश्वास पर, शोषण के तंत्रों पर, अत्याचार पर, अधिकारों के हनन करने वाली शक्तियों पर, आदि. मूलत: जो भी मानवता-विरोधी या मूल्य-विरोधी तत्व है उन पर प्रशन-चिह्न लगाना आधुनिक मानव के गुण है. हाँ बाहरी रूप से आधुनिक दिखने में कोई हर्ज नहीं परंतु इससे कहीं और महत्त्वपूर्ण है कि हम अपने विचारों में आधुनिकता लाए. इसलिए, आधुनिकता को किसी समय-सीमा में बांधकर समझना अतना सार्थ्क नहीं है. कबीरदास ने अपने समय के समाज की बुरी प्रथाओं, कु-व्यवहारों, अंधविश्वासों आदि का खुलकर खंडन किया था, अपनी काव्यात्मक शक्ति व प्रतिभा के माध्यम से उन पर व्यंग्य किया था, इसलिए कबीर अपने समय के आधुनिक कवि रहे.. इस लाइन में आप सोचें, तो एक नया दृष्टिकोण आपके सामने आएगा मगर ध्यान रहें मानवता की कसौटी पर ही इसे देखें. जो भी कार्य आधुनिक होते हुए ग़ैर-मानवीय भावनाओं व क्रियाओं को जगह देते हैं, उनमें आधुनिकता कतई नहीं होती.

अगली बार हम “हिंदी साहित्य का इतिहास, समाज और उसकी प्रवृत्तिअमूल्क अध्ययन” पर ध्यान केंद्रित करेंगे. the next lecture will be based on this.

So, come prepared.

Recommended Readings:

1) हिंदी साहित्य का इतिहास  (रामचंद्र शुक्ल) 

2) हिंदी साहित्य का इतिहास (डॉ नगेंद्र) 

3) साहित्य और समाज (रामधारीसिंह दिनकर) 

 

awaiting your comments on today’s class.

take care.

शुभं ..

विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

6 Responses to BA Yr 1 – Class 2

  1. ramjheetun karishma devi says:

    आदर के पात्र गुरुदेव आप्को शमा माग्ने की कोयी आव्श्यक्ता नही

  2. ramjheetun karishma devi says:

    the class was indeed very interesting

  3. khus21jaan says:

    no need to apologise sir…aaj class intersting tha..aur yahan baat bhi sach hein ki humein aur thora samay lagega wahan par ghool milne ki…humare class mein aise kafi students hein jo bolna,participate kana pasand to karte hen lekin kahi na kahi darte hein….like me……bt will try to get familiar sir…aaj dusra class tha..aapke ke saath..i found it quite interesting….aur agli baar hindi mein likne ki koshish karugi..

    My kind regards..

  4. Pooja LUCHOO says:

    आज की कक्षा काफी गहुरी थी लेकिन मुझे समझ में आया।
    I like the way you mixed Hindi and English together to explain us because it appears more easy to understand!!that does not mean that i don’t understand Hindi,it is just more understandable!! Again the class was interesting&not boring!!you explained a tough chapter enough easily sir,…

  5. Ujoodha Priya says:

    ok गुरूजी..
    हम तैयारी करके आएँगे

  6. Varsha Goburdhun says:

    http://hi.wikipedia.org/wiki/हिन्दी_साहित्य_का_इतिहास

    मुझे आशा है कि यह आप्के लिये सहायक होगा.

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