BA Yr 3 – Class 2

Thursday, 15 sept 2011, Ba Yr 3, Module: Media & Translation

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Dear students,

happy to conduct the 2nd class with you today. but, i was actually a bit deceived too as i expected you all to come prepared in class regarding our lecture today on “definitions of Translation”. hope this will not repeat next time.

I would need some additional classes with you to catch up backlogs, we’ll decide on it probably next time.

for today, I explained the following:

अनुवाद सर्वत्र है यह पहले भी कहा जा चुका है. अनुवाद का संबंध भाषा-विज्ञान से है. आज की कक्षा  में अनुवाद की कुछ मूल परिभाषाओं पर चर्चा की गई है और आपके सामने तर्क यह आया कि एक भाषा के भावों/विचारों को दूसरी भाषा में रूपांतरित करना अनुवाद है. वस्तुत: यह अनुवाद की सबसे सरल परिभाषा है. इसके आगे और कुछ जानना आवश्यक है. कुछ points आपके विश्लेषण के लिए रखे गए जैसे-प्रतीकांतरण, समतुल्यता, प्रतीक-विधान, भाषिक संरचना, आदि. इनपर आप अपनी ओर से तैयारी करेंगे.

जिन परिभाषाओं पर प्रकाश डाला गया वे इसा प्रकार हैं-

  • डॉ. रवीद्रनाथ श्रीवास्तव:अनुवाद की व्यापक परिभाषा के संदर्भ में कहा जा सकता है कि मूलभाषा के पाठ का प्रतीकांतरण अनुवाद है। 
  •  डॉ. कैलाशचन्द्र भाटिया:अनु. प्राचीन और अत्यंत महत्त्वपूर्ण भाषाई प्रक्रिया है।  इसके मूल में एक भाषिक संरचना/अभिव्यक्ति का दूसरी भाषिक संरचना/अभिव्यक्ति में रूपांतरण होता है।  अनु. का शाब्दिक अर्थ है: अनु + वद् + ञ् अर्थात किसी के कहने के बाद कहना, किसी कथन के पीछे (अनुवर्ती) का कथन, पुन:कथन अथवा पुनरुक्ति।  जिसमें सीमित अर्थ में आज ‘अनुवाद’ का प्रयोग किया जाता है, वह प्राचीन नहीं है। 
  •  डॉ. भोलानाथ तिवारी: एक भाषा में व्यक्त विचारों को, यथासंभव समान और सहज अभिव्यक्ति द्वारा दूसरी भाषा में व्यक्त करने का प्रयास अनु. है। 
  • भोलानाथ तिवारी: भाषा ध्वन्यात्मक प्रतीकों की व्यवस्था है और अनु. है इन्हीं प्रतीकों का प्रतिस्थाप; अर्थात एक भाषा के प्रतीकों के स्थान पर दूसरी भाषा के निकटतम (कथनत: और कथ्यत:) समतुल्य और सहज प्रतीकों का प्रयोग।  इस प्रकार अनु. ‘निकटतम, समतुल्य और सहज प्रतिप्रतीकन’ है।   

Translation Theory and Practice

Good theory is based on information gained from practice. Good practice is based on carefully worked-out theory. The two are interdependent. (Larson l991)

The ideal translation should be…

  • Accurate: reproducing as exactly as possible the meaning of the source text.
  • Natural: using natural forms of the receptor language in a way that is appropriate to the kind of text being translated.
  • Communicative: expressing all aspects of the meaning in a way that is readily understandable to the intended audience.

Translation is a process based on the theory that it is possible to abstract the meaning of a text from its forms and reproduce that meaning with the very different forms of a second language.Translation, then, consists of studying the lexicon, grammatical structure, communication situation, and cultural context of the source language text, analyzing it in order to determine its meaning, and then reconstructing this same meaning using the lexicon and grammatical structure which are appropriate in the receptor language and its cultural context. (Larson 1998)

15 Sept 2011

awaiting your comments,

i shall soon post the MIS on the blog.

take care

Vinaye

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

10 Responses to BA Yr 3 – Class 2

  1. Deepa Babajee says:

    वैश्वीकरण के इस युग में अनुवाद एक बहुत ही महत्वपुर्ण उपकरण के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। अनुवाद के सह्योग से ही विभिन्न देशों से लोग एक दूसरे से सम्पर्क करते है तथा अपने विचारों को व्यक्त करते हैं। यह ध्यान रखने योग्य है कि अनुवाद में कुछ भी मौलिक नहीं होता, इसमें कही गयी बात को पुनः कहा जाता हैं। इसके अतिरिक्त, subtitle भी अनुवाद का एक रूप हैं, इसके माध्यम से ही हम तमिल, तेलुगु, मराठी आदि भाषाओं में फ़िल्मों को समझ पाते हैं।

  2. Pratima Dookhit says:

    विश्व भर में अनुवाद की आवश्यकता महसूस किया जा रहा है| हर एक क्षेत्र में विज्ञान, टेक्नॉलोजी, कला, साहित्य, संस्कृति, राजनीति, समाज-शास्त्र जैसी शाखाओं में हो रहे शोध को दूसरे तक पहुँचाने के लिए आज महत्वपूर्ण साधन है| अनुवाद आज व्यावसायिक युग की अपेक्षा ही नहीं बल्कि अनिवार्यता भी बन गई है| अनुवाद अब दोयमदर्ज्ञे का काम न रहकर, सामाजिक एंव राष्ट्रीय महत्व का गम्भीर प्रासंगिक कार्य बन गया है|

    • Ghoora Taruna says:

      अनुवाद कार्य सरल नहीं होता| प्रायः किसी भाषा के मूल पाठ का अनुवाद इस प्रकार प्रस्तुत करना चाहिए कि वह अनुवाद न लगकर स्वतंत्र प्रवाहपूर्ण लेख लगे| अनुवादक को दोनों भाषाओँ का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए| उसे उस भाषा के प्रत्येक पदावली का अर्थ मालूम होना चाहिए शब्दों की बनावट, वाक्य रचना और व्याकरण का उसे समुचित ज्ञान होना चाहिए| साथ ही उसमें उतनी योग्यता होनी चाहिए कि वह मूल पथ के अर्थ को सहज रूप में सरल व सुबोध भाषा में सुगमतापूर्वक व्यक्त कर सके|

  3. Ghoora Taruna says:

    |अनुवाद कार्य सरल नहीं होता|प्रायः किसी भाषा के मूल पाठ का अनुवाद इस प्रकार प्रस्तुत करना चाहिए कि वह अनुवाद न लगकर स्वतंत्र प्रवाहपूर्ण लेख लगे|अनुवादक को दोनों भाषाओँ का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए उसे उस भाषा के प्रत्येक पदावली का अर्थ मालूम होना चाहिए|शब्दों की बनावट, वाक्य रचना और व्याकरण का उसे समुचित ज्ञान होना चाहिए|साथ ही उसमें उतनी योग्यता होनी चाहिए कि वह मूल पाठ के अर्थ को सहज रूप में सरल व सुबोध भाषा में सुगमतापूर्वक व्यक्त कर सके

  4. Ghoora Taruna says:

    सफ़ल अनुवादक वही होता है जिसका अनुवाद प्रायः अनुवाद न मालूम लगे अपितु वह प्रवाहपूर्ण मूल कृति मालूम लगे भषा का कच्चा ज्ञान होने के कारण अर्थ का अनर्थ हो जाता है और अनुवाद हास्यास्पद

  5. Vidushi Perwanee says:

    Our last lecture was interesting as we have learn the art of translating a text or paragraph. Through different definition of translation we have deduce of how can we translate somefing without losing its originality.

  6. Vidushi Perwanee says:

    Translating consists in producing in the receptor language the closest natural equivalent to the message of the source language. First in meaning and secondly in style.

    अर्थात्‌ मूल भाषा के संदेश के समतुल्य संदेश को लक्ष्य भाष में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को अनुवाद कहते हैं। संदेशों की यह समतुल्यता पहले अर्थ फिर शैली की दृष्‍टि से निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।

  7. RAGOOMUNDUN Anita says:

    जैनेन्द्रकुमर के अनुसार: अनुवाद क मतलब है किसी बात को एक से दूसरी भाषा मे उतार कर कहना. आवश्यक यह है कि यह बात दूसरी भाषा वाले के पास पहुँच जाए. बात का भाव सही सही पहुँचे और बीच में कहीं वहाँ अपना प्रभाव न खोए.

  8. RAGOOMUNDUN Anita says:

    According to Nida;

    Translating consists in producing in the receptor language, the closest natural equivalent to the message of the source language first in meaning and secondly in style.

  9. beeharry kavina says:

    • अनुवाद की एक सहज परिभाषा है -‘ किसी एक भाषा के विचारों , भावों , संदेशों को एक अन्य भाषा में रूपांतरण करना | ‘
    • अनुवाद करते समय अनुवादक को स्त्रोत भाषा और लक्षण भाषा के हर एक पहलू से परिचित होना चाहिए तभी वह बिना विचारों के अर्थ को बदले आसानी से अनुवाद कर सकता है |
    • यह आवश्यक नहीं कि हम शब्द-शब्द का अनुवाद करें , मूलभाव को समझकर अपने शब्दों में लिखना यह भी अनुवाद ही है|

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