BA Yr 1 FT – Class 3

Friday, a6 Sept 2011, BA 1 FT, 09.30 – 11.00.

Module: Literary Theory & Forms of Hindi Literature

dear students,

another class today. I welcome especially Run Ranveer, who has not been present in my previous classes. wish everyone is doing well and you are getting accustomed to the MGI campus.

well today’s lecture was based on the background aspects of what we are going to study further. it is very important for you to understand that literature has a close link with society. literature in fact, is a product of societal movements. in this way, as told you last time साहित्य समाज का आंशिक दर्पण है. आधुनिक आलोचनाओं का केंद्र साहित्य के समाजशास्त्रीय अध्ययन पर टिका हुआ है. इसलिए समाज-विरोधी अथवा मानतवता-विरोधी विचार वाले साहित्य को सामाजिक उत्कर्ष के लिए नकारात्मक माना गया है. साहित्य का धेय समाज को आगे बढ़ाना, उसे विकसित करना तथा उसकी रूढ़िवादी व्यवस्थाओं को चुनौती देना है. इस पहलु को समझना अत्यावश्यक है.

दूसरी बात, साहित्य्कार जब अपनी रचनाओं का लोकार्पण करता है तब उसकी कृतियों पर समाज व पाठकों का अधिकार स्थापित हो जाता है. इसलिए मानवीय संवेदना को रेखांकित करने वाले साहित्य ही श्रेष्ठ साहित्य कहलाते हैं.

यह हुआ आज के lecture का एक हिस्सा.

दूसरे भाग में हिंदी साहित्य के इतिहास का एक विहंगम आकलन किया गया. आदिकाल की सभी प्रकार की परिस्थिथियाँ, हलचलें व प्रवृत्तियाँ व्याख्यात्मक ढंग से आपके सामने रखी गईं. समान दृष्टिकोण भक्तिकाल व रीतिकाल को समझाते हुए अपनाया गया. शेष research आप स्वयं आपनी ओर से कीजिए.

In our next class, we’ll work on: –

  • आधुनिक काल के उद्भव की मूलभूत प्रवृत्तियाँ
  • नारी सशक्तीकरण (empowerment)
  • कुछ मुख्य रचनाओं में चित्रि विचार-दृष्टि
  • साहित्य और समाज (extended)
इस बीच , महात्मा गांधी संस्थान में हिंदी सप्ताह वाला वातावरण छाया रहेगा. आप सभी से आग्रह है कि पूरी तैयारी के साथ सभी गतिविधियों में भाग लें तथा हिंदी को अपनी भूमिका से और अधिक गौरवांवित करें.  इसके चलते आपकी personality का भी निर्मण होता जाएग.
जय हिंदी!
आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में,
विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

10 Responses to BA Yr 1 FT – Class 3

  1. khus21jaan says:

    सादर नमन् ,
    आज मुझे कुछ नई बातें सीखने का अवसर मिला “साहित्य और सामाज”…..के बारे में….
    मैं यहि कह सकती हूँ कि पुरानी परम्परायें आज भी साहित्य का विशष बन सकता है परंतु नवयुग कवि
    उन्हें नयी दिशा में देखते हैं…
    साहित्य में मौलिकता और रचनात्मकता है…
    (और आज जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी वह इस प्रकार हैं………….
    1.”अगर कोई साहित्य समाज का विरोधी है तो वह साहित्यकार कहलाने के योग्य नहीं है ”
    2.”संसार में रहो लेकिन संसार को मन में न रखो”
    3.”ना रखो संसार से कोई अपेश्रा ना ही कोई उम्मीद”….
    4.”Great things may come from small beginning”
    5.”The first step is always hardest….”

  2. khus21jaan says:

    सादर नमन् ,
    आज मुझे कुछ नई बातें सीखने का अवसर मिला “साहित्य और सामाज”…..के बारे में….
    मैं यहि कह सकती हूँ कि पुरानी परम्परायें आज भी साहित्य का विशष बन सकता है परंतु नवयुग कवि
    उन्हें नयी दिशा में देखते हैं…
    साहित्य में मौलिकता और रचनात्मकता है…
    (और आज जो बात मुझे सबसे अच्छी लगी वह इस प्रकार हैं………….
    1.”अगर कोई साहित्य समाज का विरोधी है तो वह साहित्यकार कहलाने के योग्य नहीं है ”
    2.”संसार में रहो लेकिन संसार को मन में न रखो”
    3.”ना रखो संसार से कोई अपेश्रा ना ही कोई उम्मीद”….
    4.”Great things may come from small beginning”
    5.”The first step is always hardest….”
    $hghsgv

  3. Ujoodha Priya says:

    मुझे आपके समझाने का माध्यम बहुत अच्छा लगा…
    मैं हमेशा समझती थी कि साहित्य एक बोरिंग विशय है पर आपके समझाने पर न केवल मुझे समझ में आया पर साहित्य मुझे रोचक लगी..फिरभी इस में कुछ एैसे अंश है जो भारी है…

  4. LUCHOO Pooja says:

    नमस्ते गुरुजी,
    आज हमने साहित्य और समाज पर अधिक चर्चा कि।साहित्य के मूल तत्व,आदि पर बात किये।
    साहित्य और समाज-दोनों का समबन्ध गहरा है।
    अन्य शब्दों में,जीवनधारा ही साहित्य में अभिव्यक्त होता है।
    परिस्थियाँ और अनुभूतियाँ भी साहित्य का विकास करते हैं।
    आपने भक्तिकाल और आदिकाल में भी कई उदाहरण दिये।
    संत कबीर,प्रेमचंद जी की “quotation” भी आपने प्रयोग किया।
    यह विषय और भी रोचक बनती जा रही है,…।

    धन्यवाद।

  5. Yatasha says:

    Interesting class though i was expecting little more details abt the rajas in aadikaal..Quite unlikely Ive always loved to do sahitya ka itihaas n am luking forward 4 mre enriching classes!

  6. Sulakshana Roopowa says:

    आप्की कक्शा बरी दिल्चस्प थि. मुझे आप्की स्म्झाने का धन्ग ( उदहरन सहित) अच्छी लगी. मुझे यकीन है की आप्की अग्ली कक्शा भी इत्नी ही दिल्च्स्प और आप्के द्वरा हमे साहित्य के बारे मे और जान्करी मिलेगी.

  7. Alvina Janna Naikeny says:

    मुझे कक्षा का दूसरा भाग बहुत पसंद आया जब आपने कैलाश और रन को राजाओं की तरह प्रस्तुत किया. ऐसा लग रहा था की हम सच मुच रन भूमि में थे. मुझे वह पृष्ठभूमि बहुत पसंद आया. धन्यवाद

  8. parmeetah deeljore says:

    आदिकाल से आधूनिकाल की यात्रा रोचक थी। आप्के स्म्झाने का द्ग मुझे बहुत पसन्द आया।

  9. prinita mutty says:

    The class was interesting and i like the way you present the class.

  10. Mamta gopalsing says:

    नमस्ते गुरुजी \
    कक्षा के आरम्भ में ,मैं थो‌ड़ी भटकी हुई थी क्योंकि पिछ्ले कक्षा में मैं अनुपस्थित थी \
    परंतु जब आपने विस्तारपूर्वक सम्झाना शुरू किया तो मुझे धीरे धीरे समझ में आने लगा \
    आदिकाल के कवियों तथा राजाओं की बात ने कक्षा को और भी रौचक बना दिया, क्योंकि हमें इन सब के बरे में पता नही था \ आपके समझाने का तरीका मुझे बहुत अच्छी लगी \

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