हिंदी सप्ताह 2011 – स्वरचित कविता प्रतियोगिता

महात्मा गाँधी संस्थान के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह 2007 से एक परंपरा जैसा हो गया है। जहाँ विश्वविद्यालय ने इस पूरे सप्ताह को activity week घोषित कर दिया है जहाँ औपचारिक रूप से कक्षाएँ नहीं लगतीं, वहाँ हमारे संस्थान में अनेक गतिविधियों के माध्यम से कैम्पस में हिंदी का वातावरण छाया रहता है। इस दौरान सभी छात्र-छात्राएँ, विभाग से सभी सदस्य तथा अन्य विभाग के स्टाफ भी इन गतिविधियों में शामिल होते हैं।

2011 के हिंदी सप्ताह का आरंभ स्वरचित कविता प्रतियोगिता के साथ आज आरंभ हुआ जिसमें छात्रों की ओर से करीब 30 प्रविष्टियाँ थीं परंतु अंतत: केवल 14 लोगों ने अपनी कविताएँ सुब्राह्मण्यम भारती सभागार में सहृदय-आस्वादकों के सामने प्रस्तुत की। मंगलवार 20 सितम्बर का यह कार्यक्रम 1 बजे डॉ चंपा रघुनंदन तथा डॉ जयचन्द लालबिहारी के संचालन में आरंभ हुआ। विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव श्रीमती पूनम जुनेजा तथा उप-महासचिव श्री गंगाधरसिंह/गुलशन सुखलाल ने इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति से इसमें चार-चांद लगा दिया।

इस गतिविधि में अपना आरंभिक वक्तव्य देते हुए हिंदी विभाग की अध्यक्षा डॉ राजरानी गोबिन ने कहा कि हिंदी सप्ताह की इस परंपरा को सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी के सहयोग प्राप्त हुए और आशा है कि भविष्य में भी ऐसा ही हो। उन्होंने यह भी कहा कि मॉरीशस का हिंदी साहित्य अन्य diaspora देशों के हिंदी साहित्य की तुलना में अधिक है, इससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए, साथ ही साहित्य-सृजन में अपना योगदान देते रहना चाहिए। इसके बाद संस्कृत विभाग के डॉ पूर्णिमा रघुबर ने एक मधुर गीत से इस गतिविधि का प्रारंभ किया।

14 प्रतिभागियों के नाम और उनकी कविताओं का शीर्षक इस प्रकार है – खुशबू, याचना, मिश्रा (अमीरी का भूत), नलिनी गुरदयाल (वसीयत), हेना सांपॉल (पैसों का खेल), करण बलदावू (जीने का अभिशाप), ज्योति रमेसर (प्रकृति), रूमिला रघुनंदन (गरीब), रण्वीर बंसी (भौतिकतावाद), पद्मजा दोमन (अपनी कक्षा की हमजोड़ी), यशसवी रामनियाल (माँ का हत्यारा), सारिका जधन (पाखंडी से बचो), मनीषा रमशरण (विश्रृखलित समाज), अनिष्ठा मुत्तन (माँ), और दियालक्ष्मी बंधन (समाज के रंग)।

छात्रों ने अनेक विषयों पर, अपने अनुभवों के आधार पर अपनी रचनात्मक कृतियाँ पेश कीं। कुछ ने सभी के मन को भावुक कर दिया और कुछ ने अनेक सामाजिक व व्यक्तिगत समस्याओं पर चिंता करने के लिए दिमाग को विवश कर दिया। सभी की भागीदारी सराहनीय रही।

अंत में डॉ हेमराज सुन्दर तथा जनाब स्वाबीर गुदर ने अपनी कविताओं व शायरियों से सभी को मुग्ध कर दिया। निर्णायक मंदल के डॉ अलका धनपत तथा सुश्री अंजलि चिन्तामणि ने अपने कार्यभार को बखूबी निभाते हुए परिणाम घोषित किए जो इस प्रकार हैं –

प्रथम पुरस्कार: करण बलदावू (जीने का अभिशाप) 

द्वितीय पुरस्कार: यशसवी रामनियाल (माँ का हत्यारा)

तृतीय पुरस्कार: पद्मजा दोमन (अपनी कक्षा की हमजोड़ी)

इस गतिविधि की समाप्ति करीब ढाई बजे हुई।

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

One Response to हिंदी सप्ताह 2011 – स्वरचित कविता प्रतियोगिता

  1. rajni jhurry says:

    सर्वप्रथम सभी हिन्दी प्रेमियों को बधाई। महात्मा गांधी संस्थान द्वारा आयोजित हिन्दी सप्ताह हम हिन्दी प्रेमियों के लिए स्वर्णावसर सिद्ध हुआ।विजेताओं को मेरी ओर से बधाई।

    रजनी

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