हिंदी सप्ताह 2011 : नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता

महात्मा गांधी संस्थान में हिंदी सप्ताह : नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता

बुधवार, 21 सितम्बर 2011, 12 बजे

आज संस्थान के भारतीय भाषा कॉम्प्लेक्स के प्रांगन में नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ जिसमें बी.ए. प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष के छात्रों-छात्रों ने अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से किया। यह गतिविधि हिंदी विभाग की ओर से हिंदी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित की गई थी जिसमें अनेक विभागों के सदस्य, विश्व हिंदी सचिवालय के उप-महासचिव, श्री गुलशन सुखलाल, रवीद्रनाथ ठाकुर महाविद्यालय के हिंदी शिक्षकगण व छात्राएँ आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ अलका धनपत तथा डॉ के के झा द्वारा किया गया। निर्णायक मंडल के सदस्य थे डॉ राजरानी गोबिन और विनय गुदारी। स्वागत भाषण डॉ संयुक्ता भोवन-रामसारा ने किया।

नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में कुल 6 टोलियाँ रहीं जो इस प्रकार हैं: –

1)      बी ए तृतीय वर्ष : नाटक – जीवन का लाल रंग

2)      बी ए प्रथम वर्ष : नाटक – तू तू मैं मैं

3)      बी ए तृतीय वर्ष : नाटक – मधुर मुस्कान

4)      बी ए द्वितीय वर्ष : नाटक – सत्ते पे पट्ठा

5)      बी ए तृतीय वर्ष : नाटक – ई-ज़िदगी

6)      बी ए तृतीय वर्ष : नाटक – शक्ति-सेना

प्रथम टोली ने रक्त-दान के संदर्भ में रक्त देने के लिए उदासीन जनता के लोगों की उपेक्षित मानसिकता पर अपनी नाट्य विष्यवस्तु को केंद्रित किया। इस टोली के छात्रों ने बड़ी ही गंभीर शैली में आसान और स्पष्ट ढंग से अपनी प्रस्तुति दर्शकों के सामने रखी। “आओ आओ, रक्त दो, रक्त दो, जन बचाओ, जान बचाओ” की गूँज काफ़ी देर तक दर्शकों के मानस-पटल पर झंकृत होती रही। मॉरीशस अथवा किसी भी देश के समाज की इस वास्तविकता को बड़ी ही कुशलता और नुक्कड़ नाटक की सामान्य विशेषताओं का पालन करते हुए सामने रखी गई।

दूसरी टोली प्रथम वर्ष की थी जिन्होंने संभवत: प्रथम बार के लिए प्रयास किया। नुक्कड़ नाटक के संदर्भ में कुछ सामान्य जानकारियों का अभाव होते हुए भी उनकी प्रतिभाएँ सामने आईं। छात्राओं ने युवा पीढ़ी से जुड़ी कुछ ज्वलंत समस्याओं को उजागर किया।

तृतीय टोली (मधुर मुस्कान) ने अधिक पैसों की आकांक्षा रखने वाली एक ऐसी महिला पर अपना नाट्य-विषय केंद्रित किया जो दूसरों की पीड़ाओं को स्वानुभव के आधार पर समझने लगती है। इसमें सामाजिक सेवा का भी पहलू दिखाई देता है।

टोली 4 ने मनोरंजन की शैली में अपनी प्रस्तुति उन वृद्धों पर ध्यान केंद्रित की है जो सरकारी सेवाओं का कहीं न कहीं कुछ अधिक ही लाभ उठाने लगते हैं जिनसे परिवार और समाज में कुछ अड़चनें उत्पन्न होने लगती हैं। अभिनय के माध्यम पात्रों ने खुद पर व्यंग्य कसा है।

टोली 5 (ई-ज़िन्दगी)ने आधुनिकता पर ही प्रश्न चिह्न लगाते हुए बिगड़ते पारिवारिक सामाजिक मूल्यों को उजागर किया। युवा पीढ़ी की ई-मानसिकता को इस नाटक में पस्तुत किया गया है जिसकी वजह से प्रगति और विकास की अवधारणाएँ बदल रही हैं।

टोली 6 (शक्ति-सेना) ने सौरम्य काव्यात्मक व व्यंग्यात्मक शैली में नारी के संदर्भ में अपनी प्रस्तुति के माध्यम से अनेक सवाल उठाए जो कहीं न कहीं समाज के संतुलन को बिगड़ने पर विवश कर रहे हैं। इसमें पति-पत्नी संबंध, व्यभिचार, कु-प्रथाएँ आदि अलग अलग दृश्यों के माध्यम से प्रस्तुत किए गए।

इस नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता की विजेता टोली “सत्ते पे पट्ठा” दल को गई जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री याचना मिश्रा को मिली।

इस कार्यक्रम के अंत में विशव हिंदी सचिवालय से आए श्री गुल्शन सुखलाल ने नाटकों की समग्र टिप्पणी करते हुए छात्रों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

Vinaye Goodary

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

2 Responses to हिंदी सप्ताह 2011 : नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता

  1. anjalee says:

    Aap ne nibandh ke baare mein kafi jankariyan deen. Aap ko dhanyavad

  2. Ujoodha Priya says:

    इस साल तो मैं नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता में भाग न ले सकी परन्तु
    अगले साल मैं आपको निराश न करूगी…

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