महात्मा गांधी संस्थान में हिंदी सप्ताह: पुरस्कार वितरण समारोह

शुक्रवार, 23 सितम्बर 2011, महात्मा  गांधी संस्थान ऑडिटोरियम

आज महात्मा गांधी संस्थान के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह का समापन पुरस्कार वितरण    समारोह के साथ हुआ. यह कार्यक्रम 23 सितम्बर 2011 को 1 बजे एम. जी. आई. के ऑडिटोरियम में प्रारंभ  हुआ जिसमें मुख्य अतिथि भारतीय उच्चायोग के भाषा एवं शिक्षा विभाग के अधिकारी व द्वितीय सचिव, श्री  मीमांसक जी ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा में चार-चाँद लगा दी. अतिथियों में, महात्मा गांधी  संस्थान तथा रवींद्रनाथ ठाकुर संस्थान परिषद के अध्यक्ष श्री रवींद्र द्वारका, विश्व हिंदी सचिवालय के महा-  सचिव, श्रीमती पूनम जूनेजा, उप-महा-सचिव, श्रीगंगाधरसिंह सुखलाल (गुलशन), एम जी आई के tertiary    sector की अध्यक्षा, डॉ रेशमी रामधोनी आदि उपस्थित थे. यह वह समारोह रहा जहाँ पर हिंदी सप्ताह के  अंतर्गत सभी छात्रों के उत्साह को बढ़ाते हुए अनेक गतिविधियों के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया.

समारोह के आरंभ में अपना वक्तव्य देती हुई हिंदी विभाग की अध्यक्षा, डॉ राजरानी गोबिन ने मॉरीशस में हिंदी    भाषा व साहित्य के उद्भव की कुछ महत्वपूर्ण स्थितियों व इससे संबंधित प्रयत्नों का उल्लेख किया. इस संदर्भ में उन्होंने संस्थान द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह के महत्व पर भी प्रकाश डाला.

श्री रवींद्र द्वारका ने मॉरीशस में हिंदी तथा भारतीय भाषाओं के प्रचार के आरंभित दौर की ऐतिहासिक भूमिका बाँधते हुए महात्मा गांधी संस्थान के अद्वितीय योगदान की भी प्रशंसा की. उन्होंने यह भी बताया कि इस संस्थान में सभी भारतीय व ancestral भाषाओं को विश्वविद्यालयीय स्तर तक पढ़ाने का गर्व भारत एवं मॉरीशस सरकार के मिले-जुले सहयोग से निर्मित महात्मा गांधी संस्थान को प्राप्त है और सभी इस दिशा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. अन्य हिंदी सेवी संस्थाओं के सहयोग की आकांक्षा रखते हुए श्री द्वारका जी बताया कि संस्थान की ओर से इस दिशा में एक white paper तैयार किया जा रहा है.

भारतीय उच्चायोग से आए, समारोह के मुख्य अतिथि व प्रसिद्ध हिंदी सेवी, श्री मीमांसक ने एम जी आई व मॉरीशस में उपस्थित विश्व हिंदी सचिवालय को भाषा एवं संस्कृति के स्तर पर मॉरीशस एवं भारत के बीच सेतु के रूप में बताया. ‘हिंदी हमारी ज़मीन की भाषा है’ यह बताते हुए मीमांसक जी ने मॉरीशस के हिंदी प्रेमियों को नाभि के रिश्ते के रूप में बताया, और यह भी कहा कि जिस माँ और अपने बच्चे का संबंध यहाँ बखूबी देखा जा सकता है.

समारोह का आरंभ लगान फिल्म के “ओ पालन हारे, निर्गुण और न्यारे” बी ए द्वितीय वर्ष की छात्राओं (जयवीण, खुशबू, मनीषा और याचना) के मधुर संगीतमय गीत के साथ हुआ.

इसके पश्चात प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार पाने वाले करण बलदाऊ, यशसवी रामनियाल और पद्मजा दोमन ने बारी बारी से अपनी कविताएँ उपस्थित लोगों के सामने पढ़ीं.

तत्पश्चात नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता जीतने वाली टीम के छात्रों (बी ए द्वितीय वर्ष – “साठे पे पाठा”) ने अपनी प्रस्तुति से सभी को आनंदित किया.

पुरस्कार वितरण समारोह का केंद्र विजेताओं को पुरस्कृत करना था जिनमें इन गतिविधियों के विजेता इस प्रकार हैं –

  • श्रुतिलेख –
    • अमर मंग्रा
    • तीना जगू मोहेश
    • सबिता सिवपाल
  • स्वरचित कविता प्रतियोगिता
    • करण बलदाऊ
    • यशसवी रामनियाल
    • पद्मजा दोमन
  • नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता
    • “साठे पे पाठा” – बी ए द्वितीय वर्ष के छात्र
  • अंत्याक्षरी प्रतियोगिता
    • बी ए तृतीय वर्ष की “रागिनी” टोली

समारोह का संचालन हिंदी विभाग के प्रवक्ता – अंजलि    चिंतामणि और डॉ कृष्ण कुमार झा द्वारा संपन्न हुआ.  उपस्थित सभी लोगों को मिठाइयाँ वितरित की गईं.

 रिपोर्ट: विनय गुदारी         

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

2 Responses to महात्मा गांधी संस्थान में हिंदी सप्ताह: पुरस्कार वितरण समारोह

  1. Reshmee Gokhool says:

    जिस परम्परा को MGI इतने सालों से निभाता आ रहा है वह अपने आप में एक बहुत बरी बात है क्योंकि इससे हमारा मनोरंजन होता तो है पर साथ हि ये गतिविधियां हमें हिन्दी भाषा के और निकट लाती है. अवशेष इस बात का है कि प्रथम वर्ष के छात्र कम थॆ पर आशा है कि हम उनके लिये एक प्रेरणा अवश्य छोड़कर जा रहे हैं. जीत या हार कोई मान्यता नहीं रखता…केवल भागिदारी पर्याप्त है.

    • saurabh kumar says:

      हमें जानकर प्रशन्नता है कि आप लोग इतने बेहतरीन तरीके से हिन्दी दिवस मनाते हैं।हिंदी की बढती मांग हिंदी भाषियों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। हिंदी के सामने चुनौतियां हैं।इसके लिए हम तैयार हैं।हमें तकीनीकी क्षेत्र में हिंदी का अत्याधिक प्रयोग करना है।इसके लिए हमें हिंदी को तकनीक के अत्याधिक अनुकूल बनाना है।इस प्रयास में आपका-हमारा सहयोग काफी महत्वपूर्ण है।

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