BA Yr 1 – Class 5 : काव्य लक्षण

BA Yr 1, Fri 30 Sept 2011, 09.30 – 11.00.

Module: Literary Theory & Forms of Literature

 

 

नमस्कार सभी को,

आज की कक्षा में भारतीय काव्यशास्त्र के विषय में आपको समझाया गया. साथ ही संस्कृत विचारकों के मूल सिद्धांतों की भी चर्चा की गई.

दूसरे भाग में काव्य लक्षण पर प्रकाश डाला गया. मेरी अपेक्षा यह थी कि आप सभी काव्यलक्षण पर तैयारी करके आते मगर ऐसा नहीं हुआ.. भविष्य में इसका खयाल रखें..

फिलहाल पॉवरपोईंट प्रस्तुति के मुख्य पहलुओं को प्रकाशित कर रहा हूँ..अगली बार आप  तैयारी के साथ आइए,कृपया.

विचारकों के वर्ग

  1. संस्कृत आचार्य
  2. हिन्दी आचार्य
  3. आधुनिक युग के हिन्दी विद्वान
  4. पाश्चात्य विचारक

1. संस्कृत आचार्य

काव्य शब्दार्थमय है। 

भरत मुनि – सुन्दर कोमल पद, गूढ़ शब्दों से रहित, सरल, युक्तियुक्त रस …

भामह –शब्दार्थौ सहितौ काव्यं

दण्डी –चमत्कारपूर्ण अर्थ से युक्त सरस व मनोहर पदावली

रुद्रट – ननु शब्दार्थौ काव्यं

वामन –

  • गुण और अलंकार से सुसंस्कृत शब्दार्थ
  • साहजिक सौंदर्य & कृत्रिम सौंदर्य
  • दोषों का परित्याग

काव्य चमत्कारपूर्ण रचना है। 

˜   कुंतक (वक्रोक्ति आचार्य)

  • काव्य – शब्द और अर्थ का संयोजन
  • कल्पना कौशल से उत्पन्न
  • चमत्कार से युक्त
  • सहृदयों को आनन्द प्रदान करने वाला

विश्वनाथ                     : वाक्यं रसात्मकं काव्यं

आनन्दवर्द्धन           : सहृदयजन्य आनन्द आह्लाद

मम्मट                    : दोष-रहित, गुन-सहित,

अलंकारयुक्त

पंडित जगन्नाथ         : रमणीय अर्थ का प्रतिपादन करने वाला शब्द

 

2. हिंदी आचार्य

रीतिकाल के कवि

रीतिकालीन आचार्य – काव्य का आंतरिक + बाहरी पक्ष

आचार्य देव     : ऐसे सार्थक शब्द जिनमें छन्द, भाव, अलंकार व रस हो।

कुलपति : शब्दार्थमय छन्द रचना (कवि की कल्पना शक्ति)

ठाकुर : छन्दबद्धता & रसात्मकता

 

3. आधुनिक युग के हिन्दी विद्वान

आधुनिक युग के हिन्दी विद्वान

महावीरप्रसाद द्विवेदी : यथार्थता, सरलता, भावोद्वेग के गुण (रीतिकालीन विचारकों का विरोध)

आचार्य रामचंद्र शुक्ल : राग तत्त्व की प्रधानता

आनन्द तत्त्व & कल्याण तत्त्व

श्यामसुंदरदास : रस, ज्ञानयुक्त, शास्त्रीय साहित्य का विरोध, काव्य की कलात्मक आह्लादकता

जयशंकर प्रसाद : श्रेयमयी प्रेय रचनात्मक ज्ञानधारा

प्रेमचंद : साहित्य जीवन की आलोचना है।

महादेवी वर्मा: सत्य और सौंदर्य का सामंजस्य

नंददुलारे वाजपेयी: भाव, सौंदर्य, रस

सुमित्रानंदन पंत: कविता परिपूर्ण क्षणों की वाणी है। 

 

4. पाश्चात्य विचारक

Aristotle

it is an imitation of nature … by means of words.

Wilson

Poetry is the intellect coloured by feelings.

Milton

Poetry should be simple, sensuous and impassioned.

Wordsworth

Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings. It takes its origin from emotions recollected in tranquillity.”

Coleridge

Poetry is the excitement of emotion for the purpose of immediate pleasure through the medium of beauty.

Poetry is the best words in the best order.

Shelly

Poetry is the record of the best and happiest moments of the happiest and best minds.

Mathew Arnold

Poetry is, at bottom, a criticism of life.

Johnson

Poetry is the art of uniting pleasure with truth by calling imagination to the help of reason.

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

18 Responses to BA Yr 1 – Class 5 : काव्य लक्षण

  1. soumaan puran says:

    we’ve got a deep notion of kavyashatra and kavya siddhant. I will certainly prepare for the next class sir.

  2. devika munger says:

    Namaste guruji,
    Bhale kavya shastra thoda niras hai parantu aap ne alaankar ko geherai se parkha.humein alaankar ke bare bahaut jaankari mili aur agli tayari karne ki puri koshish karenge.

  3. Divya Sandooram says:

    Aapko pranaam…
    kakshaa ki shurvaat mein vishay kuch niras tha par baad mein,aapke samjhane ke tarike se aur hansi mazak se vishay kuch rochak bana…
    alankaar ke baare mein jo kuch bhi aapne kahaa,mere liye bahut labhprad sidh hua hai…dhanyavaad…

  4. sheoram sheetal says:

    क्क्शा बहुत बोझिल है,पर हुम पुरा सह्योग देगे………..

  5. LUCHOO Pooja says:

    इस कक्षा में आपने अलंकार की विशेषताऍ पर जानकारी दिये जो साहित्य की सौदर्यता बढाता है और अलंकार ही काव्य की आत्मा है।आपने वक्रोक्ति का उलेख किया जहाँ आपने Romeo And Juliet का उदाहरण दिया।मनुष्य घटनाओं से समजोता करने की शमति रखते हैं और भुलने की शक्ति भी रखते हैं।तभी वे कविताओं तथा साहित्यों के माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त करते है।आपने भरत मुनि और अनेक आचार्यों के बारे में चर्चा कि।

  6. Jyoti ramessur says:

    शुक्रवार की कक्षा में संषेप रूप में अलंकार के उत्पति एवं विभिन अर्चार्ययों के मत से परिचित हुए.वैसे तो काव्य शाश्त्र मुझे अति रोचक दिखी. काव्य दर्शन की एक jhlak भी मिल्ली.काव्य में रस और अलंकार दोनों avashyak hai.

  7. Nivesh Run says:

    namaste guruji…mein mgi ke computer lab mein houn aur yahan indic ime download nahin kar pa raha houn…mera computer kharab hai isi liye mein der se comment kar raha houn.. aapki class to mind blowing hai…boleto ekdam hi tech.. aapne jo yahan technology ka tarika apnaya hai isse hindi mein aur bhi rochakta aa gayi hai..ab lag raha hai ki hum university mein siksha prapt kar rahe hai..

  8. kriteeka Gungaram says:

    आज की 5 कक्षा काफि बोजहिल थी पर फिर भी समज्ने की कोशिस की।

    * दर्शन हमे रहस्यवादी चटना से भर देते है और विञान उतर देते है।

    * कविता/काव्य- अभिव्यक करने के एक माध्यम है।
    कवि का कर्म/ काम कविता लिखना है- “कवि कर्म काव्यम्”।

    काव्य के दो तत्व होते हैं:

    (१) प्रतिपाध्य विशय।- मान्विय अनुभुतियो को खुद अभिव्यक करना।
    इसके दो पक्ष होते है:

    -भाव पक्ष,
    -अनुभुती पक्ष।

    (२) प्रतिपदक विशय।
    किसी भी विशय को अभिवियक्क्त करने के लिये भाशा चाहिए।

    * काव्य लक्षण के बरे मै भरत मुनी आचार्यो के विचार:
    भरत मुनी-
    भरत मुनी नात्य शास्त्र पर अपने देते है।
    नातक के माधयम से लोगो को जाग्रित करते थे और उन्का मनोरञन करते थे।
    इन्का मान्ना था कि कविता गुर शब्दो रहित होन चाहिये और युक्ति-युक्त् रस होना चाहिये- “सुन्दर कोमल पद , गुर शब्दो से रहित्, सरल्, युक्ति-युक्त रस्”।

    am sorry for incorrect words, i tried my best!😦

  9. kriteeka Gungaram says:

    आज की 5 कक्षा काफि बोजहिल थी पर फिर भी समज्ने की कोशिस की।

    * दर्शन हमे रहस्यवादी चटना से भर देते है और विञान उतर देते है।

    * कविता/काव्य- अभिव्यक करने के एक माध्यम है।
    कवि का कर्म/ काम कविता लिखना है- “कवि कर्म काव्यम्”।

    काव्य के दो तत्व होते हैं:
    आज की कक्षा काफि बोजहिल थी पर फिर भी समज्ने की कोशिस की।

    (१) प्रतिपाध्य विशय।- मान्विय अनुभुतियो को खुद अभिव्यक करना।
    इसके दो पक्ष होते है:

    -भाव पक्ष,
    -अनुभुती पक्ष।

    (२) प्रतिपदक विशय।
    किसी भी विशय को अभिवियक्क्त करने के लिये भाशा चाहिए।

    * काव्य लक्षण के बरे मै भरत मुनी आचार्यो के विचार:
    भरत मुनी-
    भरत मुनी नात्य शास्त्र पर अपने देते है।
    नातक के माधयम से लोगो को जाग्रित करते थे और उन्का मनोरञन करते थे।
    इन्का मान्ना था कि कविता गुर शब्दो रहित होन चाहिये और युक्ति-युक्त् रस होना चाहिये- “सुन्दर कोमल पद , गुर शब्दो से रहित्, सरल्, युक्ति-युक्त रस

  10. Sulakshana Roopowa says:

    आदर्निर गुरुजी,
    आज की ककशा मे ह्म ने काव्य लक्षण पर अधिक जान्करी प्राप्त की. सब से पहले हमे कव्य के तत्व के बारे मे पता चला १) प्रतिपादय विषय २) पतिपादक सम्ग्री. संस्कृत आचार््यो के विचरो पर प्रकाश दाला. वे संस्कृत आचार्यो भरत मुनि,भामह,दण्डी,रुद्रट, और वामन है जिस्के विचार अलग अल्ग है . वक्रोक्ति आचार्य कुन्तक.
    आप्कि कक्शा मे कई अन्य शब्द से परिचित हुए जैसे सुत्यवस्थित और स्रिज्नात्मक.

    धन्य्वाद

  11. kriteeka Gungaram says:

    am sorry for the incorrect words, i tried the best possible😦

  12. Anishta says:

    namasste guruji.
    sarvapratham mein aapse kshamaa yaachnaa karti houn. mere paas computer facility nahin hai. aapki pehli kakshaa se kal ki kakshaa tak ke bare mein jitnaa kahaa jaae utnaa kam hi hogaa. mere anusaar aapki kakshaa visheshkar jis praakaar aap hum vidhyaarthiyon ko samjhaate hai usmein ek aatmiytaa hai. hindi v saahitya ke baare mein aapne jin tathtyon par prakaash daalaa hai, unse mein bahut prabhaavit hui houn.aapne humko saahitya tatha samaj ka ek anya pehloo dikhaya hai jiske bare main humne pehle dhyan hi nahin diya tha. har baar hum sirf yahin vichara karte the ki
    parantu ab gyat hua ki <samaj saahitya ka matra ek anshik darpan hota hai.

    shayad kavya shastra ka adhyayan niras pratit hota hai lekin isme ahut kuch sikhne ka swarnaawsar bhi prapta hai isiliye mere anusar yaha vishay jitna niras pratit hota hai yaha ousse bhi adhik shiksha prad hai.

    tatprakar aapne jiss prakar se saahitya kalon par charcha ki hai ousse mujhe bahut kuch janne ka awsar mila. vastav mein main hindi saahitya ke bare mein thora bahut janti thi lekin aapki vyakhyaon ne mujhe oun kalon par adhikadhik gyan pradan kiya.

    GURUJI KSHAMA KIJIYE MERE PAAS ABHI SAMAY KA ABHAV HAI ISILIYE MAIN BAKI KI COMMENTS SOMVAR KO AVASHYA KAROUNGI KYUNKI AAPKI KAKSHA KE BARE MEIN MUJHE BAHUT KUCH KEHNA HAI. ABHI MAIN POST OFFICE MEIN HOUN ISILIYE SAMAY NAHIN HAI. I AM VERY VERY VERY SORRY. THANKS BEFOREHAND.
    ANISHTA

  13. कैलाश दावोराज़ says:

    कल की कक्षा भी काव्य-लक्षण पर आधारित था. हमने संस्कृत आचार्य के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा कि है. कल की कक्षा भी रोचक थी. मैंने काव्य-लक्षण के बारे में और जानने का मौका मिला, हालाँकि मैंने इसके बारे में २ साल पूर्व पढ़ा था.
    यह एक अकाट्य सत्य है कि कविता या काव्य एक सुव्यवस्थित और एक सृजनात्मक माध्यम है. सृजनात्मक, अर्थात, संजना करना(निर्माण करना), इसी प्रकार उनको सृष्टि भी कहते है. हमारे शारीर के अंदर जो कुछ भी कार्यरत है – हमें रहस्यवादी चेतना से भर जाता है. इसी प्रकार सृजनात्मक लेखक का निर्माण होता है.
    काव्य के दो तत्व होते है : १) प्रतिपाद्य विषय, २) प्रतिपादक सामग्री.
    १) प्रतिपाद्य विषय अर्थात, मानवीय अनुभूतियाँ. इसी प्रकार हम इसे भावपक्ष या अनुभूति पक्ष कहते है.
    २) प्रतिपादक सामग्री अर्थात, काव्य को साकार करता है.
    इसके अलावा, यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि काव्य शब्दर्थामय होता है. भावनाएँ शब्द का रूप धारण कर लेती है.
    संस्कृत आचार्यों में हमें – भारत-मुनि, भामह, दण्डी, रुद्रट और वामन की मान्यताएँ दृष्टिगोचर होता है.
    १. भारत-मुनि का मानना है कि काव्य में गूढ़ शब्दों से रहित, सुन्दर और युक्तियुक्त रस और एक आपसी तार्त्म्यता होना अनिवार्य है.
    २. भामह कि मान्यता है कि शब्द और अर्थ का मिश्रित भाव काव्य कहलाता है. लेकिन भामह में एक अतिव्याप्ति दोष है. कविता कि नीव उसके शब्द और अर्थ पर आधारित रहता है- कल्पनाशीलता, मौलिकता, रस, बिम्ब, प्रतिक ध्वन्यात्मकता.
    ३. दण्डी ने कुछ खास नहीं कहा है – “पदावली” – शब्दों का समूह, मनोहर दिल को अच्छा लगे, चमत्कारपूर्ण अर्थ – अलंकार आता है.
    ४. रुद्रट का मानना है कि काव्य में शब्दों कि तरह अर्थ का भी समान महत्व होता है. अर्थ एवं शब्द की समकक्ष महत्ता को देखा जाता है.
    ५. वामन(गुण, रीति) – गुण और अलंकार से सुसंस्कृत शब्दार्थ. वह दो प्रकार के सौन्दर्य के बारे में बताते है – साहजिक सौन्दर्य और कृत्रिम सौन्दर्य. साहजिक सौन्दर्य अर्थात नयसर्गिक सौन्दर्य या गुणजन्य सौन्दर्य – प्राकृतक – युवती के अंगों में यौवन – शारीरिक गुण. दूसरी ओर, कृत्रिम सौन्दर्य जो अलंकार जन्य सौन्दर्य है – युवती के अंगों पर आभूषण का सौन्दर्य.
    ६. वामन की मान्यता थी कि गुण काव्य की आत्मा है.

    इसके अलावा यह भी सर्वज्ञात है कि कुंतक जो कि एक वक्रोक्ति आचार्य है, वह अपने बात को तेढ़े-मेढ़े से कहते है. मूलतः प्रेरणा अंदर से होता है और उत्तेजना बहार से आता है.
    यह भी विशेष उलेखनीय है कि आनंदवर्धन मानते है कि अलंकार हो न हो कोई समस्या नहीं और पंडित जगनाथ का मानना है कि काव्य की रमणीयता होना चाहिए – रस, अलंकार या किसी भी सिद्धांत का होना, लेकिन अर्थ मे रमणीयता होना अनिवार्य है.
    इसी प्रकार यह सिद्ध होता है कि काव्य-लक्षण के बारे में संस्कृत आचार्यों के विविध दृष्टिकोण थे. अतः मेरे लिए कल कि कक्षा लाभदायक सिद्ध हुआ है.

  14. Varsha Goburdhun says:

    आदर्न्य गुरुजी,
    कल की कक्शा मैं जो भी हम ने सीखा हैं,वह अतियंत ही लाब्दायक सिध हुआ क्यौंकी हमैं आचार्यों के बारे मैं जांकारी प्राप्त हुई एवं उनके काव्यों के बारे मैं पता चला. उनके विशेष्ताऐं के बारे में भी पता चला. अगर हम आपने आप ही ये सब पढा होता तो वही बात समज मैं नहीं आती. इस् के लीये हम आप्को धन्यवाद केह्ते हैं.
    सादर नमस्कार

    वर्षा

  15. Ujoodha Priya says:

    आप की कक्षा में हमें कुच संस्कृत आचार्यों के विचार,काव्यों के बारे में पता चला..जैसे आप ने कहा कि इनके अलावा हमें अन्य आचार्यों के बारे में खोज-कार्य करना हैं..
    मेरा प्रश्न यह है कि क्या सभी आचार्यों के बारे में जानना अनिवार्य है?
    क्योंकि मुझे नहीं लगता कि हम सभी को, सब संस्कृत में लिखे गए काव्यों के बारे में ,उन्हें हम कणथस कर पाएँगे..!!!

    • प्रिया, मूल विचारों को जानना अनिवार्य है. कंठस्थ करने की बात नहीं है, कुछ हिस्सों को याद अवश्य करें लेकिन आवश्यक है कि आप तर्क वितर्क करें..

  16. prinita mutty says:

    aapki kaksha mein sanskrit acharya ke bare mein pata chala aur ounke vicharon ko janne ka avsar mila. Ye bhi pata chala ki alankar aur ras kitna avashyak hai.

  17. Mamta Gopalsing says:

    नमस्ते गुरुजी इस कक्षा में संस्कृत आचार्यों के विचार तथा काव्यों के बारे में पता चला,प्रश्नो का उत्तर कैसे देना चाहिए, कैसे आप हमारे प्रश्नो का संशोधन करते हैं आदि…..के बरे में पता चला.प्रिया के प्रश्न के जवाब देने के बाद बात और भी स्पष्ट हो गई.

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