BA PT Yr 1: Lecture 6 & Lecture 7 – “चक्कर” का प्रस्तुतीकरण

Saturday 08 October 2011, 12.30 – 15.30, BA PT Yr 1, Mauritian Hindi Literature

नमस्कार मित्रो.

इस बार भी कम से कम दो छात्राएँ महेश रामजीयावन कृत “चक्कर” कहानी पढ़कर नहीं आए. यह अंतिम चेतावनी है.

कहानी के प्रस्तुतीकरण से पहले सेमिनार के रूप में हमने इस कहानी की मूल समस्या तथा इसके द्वारा तत्कालीन व समकालीन मॉरीशस के समाज का विश्लेषण किया. आप लोगों ने अपने अनुभव बाँटे, अच्छा लगा. कुछ कड़वे रहे परंतु यथार्थ से भरे रहे.

मुझे खुशी हुई कि इस बार कक्षा की सबसे छोटी, सुनैना ने खुद को अभिव्यक्त किया, प्रयास जारी रहें.

“चक्कर” शीर्षक की सार्थकता अनेक दृष्टियों से देखने का प्रयास किया गया. स्वास्थ्य संबंधी, चिकित्सा संबंधी आदि अनेक नि;शुल्क सेवाओं पर आधारित यह कहानी व्यवस्था व सेवाकर्मियों की ज़िम्मेदारियों पर अनेक प्रश्न उठाती है. प्रश्न बहुत ही ज्वलंत और सार्थक भी हैं. आज भी कुछ इस प्रकार की स्थितियाँ देखने को मिलती है.

मैं व्यक्तिगत रूप से Siddhi Bhagee और Teena Caumaul को धन्यवाद देता हूँ. दोनों ने रोचक व आलोचनात्मक ढंग से powerpoint के माध्यम से इस कहानी पर  प्रस्तुतीकरण दिया. साथ ही पूरी कक्षा इसमें involved रही. दोनों के प्रस्तुतीकरण में सादगी सराहनीय रही. तैयारी अच्छी रही, विशेषकर इन्होंने अनेक ऐसी समकालीन स्थितियाँ हमारे सामने रखीं. विश्लेषणात्मक दृष्टि से कहानी की सही आलोचना की गई. कुछ व्याकरणिक अशुद्धियों व तारतम्यता के अभावों को छोड़कर अनेक उद्धरणों से परिपूर्ण यह प्रस्तुतीकरण औसत से अधिक आकर्षक रहा.

प्रस्तुतीकरण पर मेरी साधारण टिप्पणी रही परंतु समय के अभाव के कारण अगली कक्षा में कहानी की व्याख्या करेंगे.

तब तक के लिए,

शुभम्,

विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

5 Responses to BA PT Yr 1: Lecture 6 & Lecture 7 – “चक्कर” का प्रस्तुतीकरण

  1. disha luchun says:

    नमस्ते गुरुजी,

    ‘चक्कर’ कहानी पर प्रस्तुतिकरण अच्छी रही, ह्में कहानी की समस्याएँ समझ में आई। कहानी में जो जो समस्याएँ हैं, आज भी हम को दिखाई देते हैं, आप ने थीक ही कहा था कि शायद डाक्टरों व staff के कमि से हस्पतालों में ऐसी समस्याअएँ उत्पन्न होती होती हैं। पर्ंतु सरकार को इन बिगरते स्थितियों पर ध्यान देना चाहिए।

    अस्पताल में तो मुफ्त ईलाज मिलता ही है, उसमें कोई संदेह नहीं है पर्ंतु अच्छी ईलाज मिलना व समय पर प्राप्त हो, यह भी आवश्यक है। जीवन में अनुशासन अति आवश्यक है, और इस कहानी में इसी की कमी दिखाई दी गयी है। महेश रामजीयावन ने इस कहानी में एक ऐसे यथार्थ को हमारे सामने प्रस्तुत किया है जो आज भी चलती जा रही है, इसे रोकना ज़रूरी हो गया है अन्यथा देश में डाक्टरों व हस्पतालों से विश्वास उठ जाएगा और इस्के साथ साथ कई अन्य समस्याएँ आ खड़ी होगी…..

    कहानी को फिर से पढ़ना होगा क्योंकि इस में समस्याएँ गम्भीर हैं।…

    आज के लिए बस यही कहना है।

    धन्यवाद,
    दिशा…

  2. siddhi says:

    नमस्ते गुरुजी
    इस सप्ताह मैं और टीना ने प्रस्तुतीकरण की. हमने पूरी कोशिश की हम इस कहानी के सभी तत्वों को तथा सभी समस्याओं को उभारा. पर समय की कमी के कारण कुछ बातें छुक गई और हमें टंकन की समस्या हुई और मेरी समस्या यह थी कि मैं अंतिम बार slide को नहीं देख पाई क्योकि teena मुझे मेल नहीं कर पा रही थी . चित्रों के कारण हम मेल नहीं कर सकें.
    मैं teena को धन्यवाद कहना चाहती हूँ क्योंकि हम सिर्फ मेल ही द्वारा आपना काम share किया और प्र्स्तुत भी की
    अब मैं अपने दोस्तों के comments जानना चाहती हूँ ताकि अगली बार हम इसे अच्छा प्रस्तुत कर सकें
    धन्यवाद

  3. teena caumul says:

    नमस्ते .मैं आज की कक्षा में चक्क्र्र कहानी पर आपकी आलोच्नाएं मिली. अच्छा लगा. हमारे प्रस्तुतिकरण पर अपना विचार व्यक्त कर हमारी कमियों पर प्रकाश डआला.आगे हम ध्यान रखैंगे.
    धन्यवआद.
    तीना

  4. prema says:

    नमस्ते गुरुजी.आज आप ने कहानी की व्याखया की जो हमारे लिये काफि लाभदायक हे.जिस सामय कक्शा हुइ थोरी नीन्द भी आ रही थी पर ध्यान देने कई पूरी कोशिश की.

  5. Sunaina Joypaul says:

    नमस्ते गुरुजी,
    आज आप ने कहानी की व्याखया की जो हमारे लिये काफि लाभदायक हे.कक्शा पर ध्यान देने पूरी कोशिश की.
    धन्यवआद.

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