BA Yr 2 FT: Lecture 7 – “चक्कर” कहानी का प्रस्तुतीकरण

Tuesday 11 Oct 2011, 09.30 – 11.30. BA Yr 2 FT, Mauritian Hindi Literature

 

नमस्कार.

आज भी दो-तीन लोग कहानी पढ़कर नहीं आए. अगली बार कृपया, सावधान रहें.

Gosheena, Hemant, Deepika and Padmajaa द्वारा आज महेश रामजीयावन द्वारा रचित “चक्कर” कहानी का प्रस्तुतीकरण रहा.

कहानी का पूर्व विश्लेषण आपके द्वारा संपन्न हुआ. सामान्य रूप से हमने मूल समस्याओं का उल्लेख किया. आपके विचार भी प्राप्त हुए.

प्रस्तुतीकरण अच्छा रहा. तैयारी अच्छी थी. हालांकि कुछ सामान्य गलतियाँ थीं फिर भी सभी ने इसे सही ढंग में प्रस्तुत करने के लिए चेष्टा की.

बाद में इसपर अधिक विस्तार दूँगा.

नोट: हेमंत, कृपया अपना पॉवरप्योईंट अपलोड करें ताकि अन्य लोग भी देख-समझ सकें. धन्यवाद.

इस प्रस्तुतीकरण पर तथा कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें.

धन्यवाद.

ध्यान दीजिए, साहित्य का अध्ययन करने वाले दूसरों को समझने की शक्ति व साहस रखते हैं … सुलह कभी कभी सामूहिक सहिष्णुता व प्रेम-तत्व के लिए अपरिहार्य होता है …

 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

10 Responses to BA Yr 2 FT: Lecture 7 – “चक्कर” कहानी का प्रस्तुतीकरण

  1. yatchna mishra says:

    mujhe unka presentation acha laga. Unhon ne bahut sare vishayon par dhyaan diya aur jo newspaper articles dhundne ka prayaas tha wo bhi accha tha…Padmajha ne prashnon ka uttar acchi tarah se diya

  2. Ratna Ramchurn says:

    चक्कर कहानी को लेकर प्रस्तुतीकरण से पूर्व कक्षा में जो चर्चा परिचर्चा हुई, व्यक्तिगत रूप से मैंने उससे बहुत कुछ सीखा. हम प्रायः हरेक समस्या के लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं-चाहे वह कुव्यस्था की समस्या हो, ब्रश्ताचार की या फिर गरीबी की…पर आज इस कहानी द्वारा मुझे एहसास हुआ कि देश के नागरिक होने के नाते हम भी दोषी हैं.

    आधुनिक युग में सुविधाओं के अभाव के कारण आज अस्पतालों में जाना सर दर्द मोल लेने के बराबर हैं. जो दशा राजेंद्र की इस कहानी में हूई वही दशा हमारी होती हैं.

    साथ ही साथ डाक्टरों को भी नम्रता के साथ रोगियों के प्रति आचरण करना चाहिए जिससे कि वे संतुष्ट रहे.
    लेकिन आज निशुल्क स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे वरदान से लोग अत्यधिक लाभ उठाते हैं. कुछ लोग बात बात पर अस्पताल आ जाते हैं. इससे डॉक्टरों का भी काम बढ़ता हैं और वे जल्दी जल्दी चेकप (Check up) कर डालते हैं. वे रोगियों को उचित समय नहीं दे पाते क्योंकि अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती रहती हैं..अब इसमें गलती किसकी हैं _ रोगियों की, डाक्टरों की या फिर सरकार की?? यह विवादास्पद हैं…

    रत्ना ^_^

  3. Ratna Ramchurn says:

    प्रस्तुतीकरण रोचक था. अख़बारों से लिए गए कई तथ्य थे जो इस कहानी में घटित समस्या को पुष्ट करती हैं.
    सभी का प्रयास सराहनीय रहा विशेषकर अणु का..उसने प्रश्नों के उत्तर देने का सफल प्रयास किया.
    इस प्रस्तुतीकरण से यह स्पष्ट हुआ की सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में सुविधा, सेवा अदि की दृष्टि से अंतर हैं.

    रत्ना ^_^

  4. nishta18 says:

    मुझे उनका प्रस्तूतीकरण बहुत ही अच्छा लगा और इस कहानी के माध्यम से अस्प्तालों की समस्याओं पर ज़्यादा जानकारियाँ प्राप्त हुई जो कि असल में ऐसा ही होता है.

  5. deepika says:

    इस कहानी का प्रस्तुतीकरण हम ने ही किया इसलिए हम इस से शायद ज्यादा सीख पाए

  6. Beeharry Tooshi says:

    नमस्ते गुरुजी…
    मेरी सहेलियों का प्रस्तुतिकरण रोचक था..’चक्कर’ कहानी के अन्तर्गत अनेक प्रश्न उठे हैं…
    जैसे कि- चिकित्सा व्यवस्था में सुविधाओं की कमी, लापरवाही, डाक्टरों की कमी, आदि…
    लेखक हमें इस बात को सोचने पर विवश करता है कि क्या अस्पताल में निशुल्क सेवा के कारण ये सब हो रहा है??? या फिर सरकार इस के लिए ज़िम्मेदार है??
    परन्तु हर बात के लिए हम सरकार को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं…
    कहानी को पूरी तरह से समझने के बाद मुझे इस बात का एहसास हुआ कि कहीं न कहीं सामान्य जन की मानसिकता के कारण ये सब विघ्न उतपन्न होते हैं…………

    धन्यवाद…
    तूशी…!!

  7. Jaishree.Boodhun says:

    चक्कर कहानी का प्रस्तुतीकरण अत्यंत ही रोचक एवं सूचनाप्रद रहा. अनु और उसकी टोली का प्रयास सराहनीय रहा.
    चक्कर कहानी में मूल संवेदना- अस्पताल में सुविधाओं एवं उपकरणों का अभाव.
    यह स्थिथि कुछ हद तक प्रासंगिक हैं क्योंकि मोरिशस के सरकारी अस्पतालों में भी यही देखने को मिलता हैं .
    क्या सारी समस्याओं के लिए सरकार को दोषी ठेराना उचित हैं? जहाँ तक हो सके सरकार अपनी ओर से जनता को आरामदायक सुविधाएं प्रदान कर रही हैं. परन्तु हम नागरिकों का भी कर्तव्य बनता हैं कि हम उनकी कोशिशों को प्रोत्साहित कर, इन सभी सुविधाओं का ठीक से लाभ उठाए.
    इस कहानी के माध्यम से लेखक ने इस तथ्य की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट किया हैं.
    कक्षा में हुई वाद- विवाद से इस समस्या को लेकर हमारी समस्त दुविधाएं दूर हो गई.
    धन्यवाद..जयश्री :))

  8. Asha Cheenatur says:

    चक्कर कहानी का प्रस्तुतीकरण रोचक था। ईस के दौरान बहुत से तथ्य पर चर्चा हुई। प्रस्तुतीकरण मै बहुत से तत्वो का उल्लेख हुआ। ईस कहानी मै जो चक्कर रोगी अस्पताल मै काट्ता है उस क उल्लेख किया गया है। रोगी के मनोदशा को दिखाया गया है। हम उस स्थिथि को हमेशा से अस्पतालों मै देखते आये है लेकिन उसे पर अपना विध्रोह नहि दिखाते। ईस कहानी मै उसी यथार्थ को दिखाया गया है। कक्षा मै हुए चर्चा के बाद बहुत से तत्वो पर हमारा ध्यान लेगया।

  9. trishila says:

    आज पराजय कहानी पर प्रस्तुतीकरण हुवा …वह बहुत अच्छा था.उस प्रस्तुतीकरण द्वारा मुझे पता चला की इसमें बाल शोषण की समस्या भी है.बलराज जा पराजय कहानी का मुख्या पात्र है बाई बच्चों सहित खेत में जाता है.यह समस्या आज भी संसार में है,पराजय कहानी द्वारा मनुष्य को सोचने पर विवश कर देता है . त्रिशिला 🙂

  10. Rishika says:

    चक्कर कहानी पर विश्लेषण हुवा एवं पराजय कहानी पर प्रस्तुतीकरण .हमें शीर्षक के विश्लेषण पर भी ज्ञान मिला. पराजय कहानी में हमें पता चला की कैसे मज़दूर हरताल करते है किन्तु अंत में हार जाते है.भले ही अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते है किन्तु अंततः उनको पराजय का सामना करना परता है.बलराज जो कहानी का मुख्या पात्र है भले ही घर में एक अन्न का दाना नहीं है किन्तु अपने स्वाभिमान के लिए लरता है. ऋषिका

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