BA Yr 3: Lecture 3 – अनुवाद की परिभाषा

Thursday 06 Oct 2011, 08.15 – 09.30, BA Yr 3, Media & Translation

 

सभी का स्वागत.

मुझे ऐसा आभास हो रहा है कि हम अपने पाठ्यक्रम के साथ बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं. इसके कारण दो-तीन है. एक तो, मैंने अपना काम 3-4 कक्षाओं बाद आरंभ किया (वजह: मेरी भारत यात्रा). दो, जिस दिन हमारी कक्षा लगती है उस दिन शुरु से अनेक गतिविधियाँ लगीं (हिंदी सप्ताह, लेक्चर, श्रम दान आदि – जिनकी अनिवार्यता आपके शिक्षण की प्रक्रिया में है ही). तीन, मॉड्यूल संबंधी आपकी तैयारी भी बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ रही है. इसका प्रमाण इस बार की कक्षा को लेकर रहा जहाँ अनुवाद की परिभाषाएँ पिछले ब्लॉग पर अपलोड कर दिया था परंतु दो-एक ही देखने-समझने के प्रयास में लगे..

सच में, मेरे लिए यह उत्साह की बात नहीं, विशेषकर जब अपनी ओर से ब्लॉग लेखन तथा कक्षा के अधुनातन रूप ब्लॉग के माध्यम से प्रस्तुत करता रहता हूँ… और बदले में कम comments! और no preparation!

मैं समझता हूँ कि आप सभी अपने शोध-प्रबंध कार्य में लगे हुए है परंतु यह भी अनिवार्य है, शेष आप तय करें.

इस बार अनुवाद की अनेक परिभाषाएँ समझाई गईं. कुछ नई बातें भी जुड़ीं – प्रतीकांतरण, बिम्ब, भाषिक संरचना, भाषिक संस्कृति आदि.

दूसरे हिस्से में, आपको अंग्रेज़ी का एक पाठ दिया गया जिसका अनुवाद कक्षा में ही करना था. आशा है कि अगली बार यह कार्य पूरा करके ही कक्षा में आएँगे.

ध्यान देने के लिए पाठ पुन: ब्लॉग पर प्रस्तुत है (अर्थात, कार्य संपन्न न करने के लिए आपके पास कोई बहाना बचा ही नहीं!!) –

 

हिन्दी में अनुवाद कीजिए।

Translation is an Art

Translation is a difficult art. It is more difficult than original writing in any language. It requires a good knowledge of two languages – one from which and the other into which the translation has to be done. But a mere knowledge of the language is not enough. The translator should be able to enter the spirit of the original or rather the writer of the original. A perfect translation is that which reproduces the sense of every expression of the original with due emphasis on spirit, as distinguished from mere words. Unless the translator is able to enter into that spirit, his translation will not be able to create the effect on the reader which the original work would produce, and I believe that rather the reproduction of a word for a word or a phrase for a phrase is not the true test of translation. We know from experience how difficult and exciting the work is. But when it comes to translating technical or semi-technical matter – whether metaphysical, psychological, poetic, scientific or technical and technological, the translation becomes infinitely more difficult, because the very concepts expressed in one language may not have a corresponding concept or its expression, if the translator does not know enough of the subject matter or of any of the two languages, to render the matter from one to the other.

–          (भारत के प्रथम राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, द्वारा डॉ. ज्ञानवती दरबार को दिनांक 06.01.60 को लिखे एक पत्र के अंश।)

 

आपके कार्य  व प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में,

शुभम्,

विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

2 Responses to BA Yr 3: Lecture 3 – अनुवाद की परिभाषा

  1. beeharry kavina says:

    • अनुवाद की एक सहज परिभाषा है -‘ किसी एक भाषा के विचारों , भावों , संदेशों को एक अन्य भाषा में रूपांतरण करना | ‘
    • अनुवाद करते समय अनुवादक को स्त्रोत भाषा और लक्षण भाषा के हर एक पहलू से परिचित होना चाहिए तभी वह बिना विचारों के अर्थ को बदले आसानी से अनुवाद कर सकता है |
    • यह आवश्यक नहीं कि हम शब्द-शब्द का अनुवाद करें , मूलभाव को समझकर अपने शब्दों में लिखना यह भी अनुवाद ही है |

  2. ghoora taruna says:

    अनुवाद करते समय भाव प्रधान विषय होनी चाहिए| किसी भाषा के मूल पाठ का भाव अपने शब्दों में सुगठित भाषा में अभिव्यक्त करना चाहिए| साथ ही यहाँ ध्यान देना नितांत आवश्यक है कि मूल पाठ के किसी भी महत्वपूर्ण अंग की उपेक्षा न हो जाय| अपेक्षाकृत अनुवादक को अभिव्यक्ति के शब्दों के चयन में स्वतंत्रता होती है| अनुवादक का ध्यान भाषा तथा शैली कि रोचकता पर होना चाहिए| अनुवादक को कभी भी शब्दानुवाद नहीं करना चाहिए अन्यथा उस अनुवाद कि भाषा दुरूह बन जाएगी| कभी-कभी गलत अनुवाद से अनुवाद कि भाषा भी गलत हो जाती है| अतः अनुवाद में विषय को अत्यधिक महत्व देना भी आवश्यक है|

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