BA Yr 3: Lecture 4 – अनुवाद & संप्रेषण + अनुवाद का महत्व

Thursday 13 Oct 2011, 08.00 – 09.30, BA Yr 3, Media & Translation 

 

नमस्कार मित्रो,

कुछ लोग दिए गए अनुवाद पूरा नहीं कर पाए, ठीक नहीं है. दुख इस बात पर भी रहा कि प्रस्तुत ब्लॉग का सही प्रयोग आप लोग नहीं कर रहे हैं. एक बार पुन: दोहराना चाहता हूँ कि ब्लॉगिंग आपके हित के लिए की जा रही है. यह एक ऐसा उपकरण है जिसके माध्यम से मुझे लगा कि आम पारंपरिक कक्षा वाली प्रणाली में विस्तार वर्ट्यूअल रूप में लाने से संभवत: शिक्षा और अधिक अच्छे ढंग के प्रेषित हो पाएगी, परंतु आप सभी के सहयोग के बिना मेरी हर कोशिश असफल रह जाएगी. शेष, आप लोग इस पर विचार करें.

आज का लेक्चर दो भागों में विभाजित रहा:

  1. अनुवाद और संप्रेषण : अंत:संबंध
  2. अनवाद का महत्व
कक्षा के आरंभ में संप्रेषण के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए यह बताया गया कि संप्रेषणीयता में साझेदारी आवश्यक पहलू है. संप्रेषण के लिए मुख्यत: 3 तत्त्व हैं:
  • व्यक्ति / स्रोत (संप्रेषक)
  • सदेश / विचार (जिसका संप्रेषण / विनिमय किया जाता है)
  • प्राप्तकर्ता
इसके अतिरिक्त दो अन्य स्थितियाँ आवश्यक हैं:
  • किस माध्यम से संप्रेषण किया जाता है
  • किस प्रभाव के साथ संप्रेषण किया जाता है.
इस संबंध में आपको दो परिभाषाएँ भी दी गईं और इन्हें समझाया भी गया.
इस प्रकार से संप्रेषण के इन तत्वों को अनुवाद के साथ जोड़ते हुए दोनों के बीच संबंध स्थापित किया गया.
इस तरह यह प्रमाणित किया गया कि आजकल मूलत: “संप्रेषण-केंद्रित अनुवाद” का अधिक महत्व है.
Note:  अनुवाद और संप्रेषण के महत्व को वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में भी समझने का प्रयास किया जाना चाहिए. भोमंडलीकरण के वातावरण में अनुवाद का महत्व और अधिक समीचीन बन जाता है.
इसके साथ मैंने लेक्चर के दूसरे हिस्से को आपके सामने रखा.
  • वैसे तो अनवाद भौगोलिक सीमाओं को लांघने में सहायक होता है.
  • विश्व-बंधुत्व के सुदृढ़ीकरण के संबंध में भी इसकी अनिवार्यता सिद्ध होती है.
  • भाषाई सीमाओं को पार करने में भी यह महत्वपूर्ण सिद्ध होता हिअ.
  • विश्व की सभ्यताओं & संस्कृतियों के विकास में भी इसका महत्व स्थापित होता है.
  • साहित्य और कला को वैश्विक मंचा प्रदान करने में भी यह सहायक है. (इसपर विशेष ध्यान दें, कृपया)
  • मानवीय ज्ञान के विभिन्न संदर्भों, संकल्पनाओं, सिद्धांतों आदि की जानकारी भी इसके द्वारा मिलता है.
  • धार्मिक ग्रंथों के प्रसार में भी इसकी भूमिका को नकारा  नहीं जा सकता.
  • विश्व के सभी देशो6 की राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक प्रगति में अनुवाद की उल्लेखनीय भूमिका रहती है.
एक परिभाषा : डॉ कृषण्कुमार गोस्वामी:-
अनुवाद के माध्यम से मानव में व्याप्त सार्वभौमिक, ऐतिहासिक और सामाजिक एकता के दर्शन होते हैं, जिसमें भाषाओं के बाहरी भेद के होते हुए भी मानवीय  अस्तित्व के समान तत्वों का परिचय मिलता है.
NOTE: अगली बार “अनुवाद की प्रकृति” पर लेक्चर केंद्रित होगा. तैयारी के साथ आएँ, कृपया.
धन्यवाद,
शुभम्,
विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

9 Responses to BA Yr 3: Lecture 4 – अनुवाद & संप्रेषण + अनुवाद का महत्व

  1. ghoora taruna says:

    सम्प्रेषण करने के उद्देश्य से ही प्रायः विचारों एवं भावों का अनुवाद दूसरी भाषा में की जाती है| अनुवाद करते समय अनुवादक मन ही मन यहाँ अवश्य जनता है कि इस अनुवाद का श्रोता या पाठक पर क्या प्रभाव पड़ेगा| अनुवादक यही आशा करता है कि जिस प्रकार वह अपने अनुवाद से प्रभावित हुआ है, उसी अनुपात में वह श्रोता या पाठक पर उस अनुवाद का प्रभाव छोड़े| प्रायः अनुवादक भाषिक संरचना के माध्यम से अपने सन्देश का प्रतिस्थापन करता है क्योंकि वह भली प्रकार से जानता है कि कोई न कोई उसका अनुवाद एक दिन अवश्य पढ़ेगा| अतः इसी प्रकार अनुवाद के माध्यम से दो भाषाओं के बीच एवं दो या अधिक व्यक्ति एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उनमें एक्य स्थापित होती है|

  2. preeshthima says:

    The class was very interesting we came to know a lot about communication but now we see the importance of translation and communication

  3. Pratima Dookhit says:

    अनुवादक चाहता है कि जिस प्रकार वह अपने अनुवाद से प्रभावित हुआ, उसी तरह उसके अनुवाद का प्रभाव पाठकों व श्रोताआँ पर पड़े| अनुवाद में मूल कथ्य, लक्ष्य भाषा में सरल और स्पष्ट रुप में अभिव्यक्त करना और संस्कृति के प्रतीकों पर ध्यान रखना होता है| भूमण्डलीकरण के युग में जिस अनुवाद की बात करते है, वह सम्प्रेषण अनुवाद कहलाया जाता है| सम्प्रेषण केंद्रित अनुवाद में जो तत्व, बिन्दुएँ है, अनुवाद में प्रवेश करते है| अनुवाद एक पूल का काम करता है| वह सभी देशों की दूरियाँ को निकट की स्थिति में परिवर्तित करता है|

  4. Vidushi Perwanee says:

    सम्प्रेषण के लिए भाषा ही सम्प्रेषण का एक मात्र साधन नहीं है, हम शारिरीक चेष्टाओं, मुख मुद्राओं एवं सहज वाचिक उत्तेजनाओं से भी अपने भावों, विचारों को सम्प्रेषित करते है लेकिन अनुवाद एक भाषा में रचित पाठ के कथ्य को दूसरी भाषा में रूपांतरित करना है।

  5. Pingback: ऋण मुक्ति एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री गणपति का विशेष मंत्र « Medicalastrology

  6. Devi Ramsing says:

    अनुवाद का कार्य लेखन कार्य से ज्यादा कठिन है | हर भाषा के शब्दों का वायुमंडल उस भाषा से अलग है और हर व्यक्ति का अस्तित्व उस भाषा बोलने वाले का व्यक्तित्व करता है | इसलिए उस वातावरण से हटकर अनुवाद में शब्दों की सुन्दर अस्तित्व खो जाता है | तो अनुवादक को सिर्फ शब्दों का अनुवाद नहीं अपितु उसे आकान्षाओं ,अनुभवों , भावनाओं और मानसिक क्रमों का मौलिक कार्य का अनुवाद करना चाहिए |

  7. Pingback: ऋण मुक्ति एवं लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री गणपति का विशेष मंत्र | | AstrologyAstrology

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