BA Yr 1 FT: Lecture 8 – काव्य हेतु (पृष्ठभूमि)

Friday 21 Oct 2011, 09.30-11.00, BA Yr 1, Literary Theory & Forms of Literature

Dear friends,

hope many of you have really enjoyed the excursion    trip yesterday. We, indeed had memorable moments at  Rochester Falls as well as St Felix seaside especially  dancing with the lovely dadis…

well, i understand many of you have not been able to  make it to attend class today. Some were present, so i  had to conduct the class.

 

आज काव्य लक्षण संबंधी मूल विचारों को समेटा गया + काव्य हेतु के संदर्भ में कुछ प्रारंभिक चर्चा की गई.

उपर वाले चित्र को अच्छी तरह से देखें. रोचेस्टर फ़ॉल्स का चित्र है. इस झरने का संबंध काव्य लक्षण के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है? काव्य के लक्षणों में आपने पाया कि यह सृजन के क्षेत्र का है, इसमें मौलिकता व नूतनता है. कवि के अंतर्मन से भाव जब निसृत होते है तो वे कविता का रूप धारण करते हैं. ठीक वैसे ही जैसे इस झरने से उपर से पानी जिस वेग के साथ प्रवाहित हो रहा है, वैसी ही काव्य-सृजन की अवस्था में कवि के हृदय से भाव उच्छृंखलित होते हैं. इसे हलचल की स्थिति भी माना जा सकता है.

अब आपने देखा होगा कि पानी में झाग इसलिए उत्पन्न होते है क्योंकि इसकी प्रवाहमय स्थिति में अनेक स्तरों पर पत्थर है, उनसे टकराने से ही पानी का शांतमय अवस्था भंग हो जाती है. इन पत्थरों को काव्यात्मक प्रक्रिया में अनेक नाम दिए जा सकते हैं- कवि के अनुभवों से भावों की टकराहट, अथवा सामाजिक व्यवस्थाओं की जटिलताओं की वजह से उत्पन्न कवि के मन में हलचल. इस तरह के अनेक बिम्ब आप जोड़ सकते हैं. ये स्थितियाँ काव्य-लेखन के लिए अनिवार्य अवस्थाएँ हैं.

इसके पश्चात आप देख सकते हैं कि पानी शांत हो जाता है (वही जगह जहाँ हम तैर रहे थे!). इसे आप काव्य-लेखन की अंतिम अवस्था मान सकते हैं जहाँ पर कवि ने किसी गर्भवती महिला के समान प्रसव वेदना से तड़पने के बाद बच्चे को जन्म दे देती है, इसी तरह से कविता को जन्म देता है कवि, तब आनंद व खुशी की इस अवस्था में शांति और संतुष्टि का आभास जब कवि को होता है तो उसे मैंने इस शांत पानी के साथ जोड़कर रखा. शेष आप लोग समझें.

दूसरे हिस्से में, मैंने काव्य हेतु के संदर्भ में यह बताया कि काव्य के सृजन के कारणों को ही काव्य हेतु कहा जाता है. इसमें 3 प्रमुख बातें हैं-प्रतिभा, व्युत्पत्ति और अभ्यास. कृपया और तैयारी के साथ आएँ…

काव्य हेतु पर कुछ नोट्स प्रस्तुत हैं:-

काव्य हेतु 

प्रयोजनउद्देश्यकोकहते है, अर्थात, किन-किन बातों कोलक्ष्यमेंरखकर कवि अपनेकार्यमें युक्त होता है। प्रेरणा प्रयोजन का आंतरिकरूपहोता है।हेतुकाअभिप्रायउन साधनोंसेहोता है जो कवि कीकाव्य-रचना मेंसहायकरहती है।

 

मम्मट के अनुसार: –

शक्तिर्निपुणता लोकशास्त्रकाव्याद्यवेक्षणात्

काव्यज्ञशिक्षया~भ्यास इति हेतुस्तदुद्भवे ।।

i.e.  काव्य उद्भव के हेतु: –

 

1)      शक्ति(कवित्व का बीज-रूप संस्कार) जिसके बिनाकाव्य-रचना होनहींसकती &यदिहोती तो हास्यास्पद हो जाती है।

2)       लोक, शास्त्र,काव्यआदिके निरीक्षण &ज्ञानसेउत्पन्नयोग्यताऔर

3)      काव्यजानने वाले काशिक्षाद्वाराप्राप्त अभ्यास

 

  • शक्ति/प्रतिभा = नैसर्गिकी / जन्मसिद्ध       ‘काव्यप्रकाश’ के अनुसार
  • शेषदो = अर्जित

 

दण्डी के अनुसार: –

नैसर्गिकी च प्रतिभा, श्रुतं च बहु निर्मलम्

अमन्दश्चा~भियोगो~स्या: कारणं काव्यसंपद: ।।

 

दण्डी ने नैसर्गिकी प्रतिभा,बहुतअध्ययन & श्रवणआदितथाउसकाबहुतउपयोगतीनोंकोकाव्य-सम्पत्ति काकारणमाना है।शक्तिको बहुत दुर्लभ माना है, उससेभीआगे, व्युत्पति (लोक & शास्त्र केज्ञानकीआश्रितऔरऔचित्य के विचार) तथाविवेककोऔर भीदुर्लभ माना है।

 

रुद्रट :

  1. सहजा (मुखय) – मनुष्यके साथ उत्पन्न होती है।
  2. उत्पाद्या – अध्ययन, अभ्यास, सत्संग सेप्राप्त होती है।

 

राजशेखर

प्रतिभा वह तत्व है जो काव्योपयोगी शब्दग्राम, अर्थसमूह, अलंकारतंत्र, उक्तिअमार्ग तथा अन्यान्य काव्योपजीवियों को अंतरात्मा में प्रतिभासित करता है। प्रतिभाशील कवि दृश्य और अदृश्य का सरलता से बोध कर लेता है। वह एक विलक्षण अंतर्दृष्टि से अलंकृत होता है और भूत, भविष्य एवं वर्तमान के गर्भ में छिपे हुए तथ्यों का साक्षात्कार प्राप्त कर सकता है। वह मनीषी परिभू एवं स्वयंभू होता है।

1)      भावयित्री प्रतिभा

2)     कारयित्रीप्रतिभा–   (क) सहजा

(ख) आहार्या

(ग) औपदेशिकी

 

—————–

काव्य हेतु

BA (Hons) in Hindi Yr I

काव्य हेतु

  • हेतु: काव्य-सृजन का कारण
  1. काव्य-हेतु: 1) प्रतिभा   2) व्युत्त्पति  3) अभ्यास
  • दंडी – नैसर्गिकी च प्रतिभा, श्रुतं च बहु निर्मलम्
  • रुद्रट –  1) सहजा (मुख्य) : मनुष्य के साथ उत्पन्न (जन्मजात)

2) उत्पाद्या : अध्ययन, अभ्यास, सत्संग से प्राप्त

  • राजशेखर – प्रतिभा वह तत्त्व है जो काव्योपयोगी शब्दग्राम, अर्थसमूह, अलंकारतंत्र, उक्तिमार्ग तथा अन्यान्य काव्योपजीवियों को अंतरात्मा में प्रतिभासित करता है।  प्रतिभाशील कवि दृश्य और अदृश्य का सरलता से बोध कर लेता है।  वह एक विलक्षण अंतर्दृश्टि से अलंकृत होता है और भूत, भविष्य और वर्तमान के गर्भ में छिपे हुए तथ्यों का साक्षात्कार कर सकता है।  वह मनीषी परिभू एवं स्वयंभू होता है। 

प्रतिभा के 2 भेद: –

1) भावयित्री प्रतिभा &

2) कारयित्री प्रतिभा [ क) सहजा, ख) आहार्या ग) औपदेशिकी ]

  • मम्मट – 1) प्रतिभा= शक्ति (जन्मजात) : कवित्त्व का बीज-रूप

2) व्युत्त्पति (लोक, शास्त्र, काव्य आदि के निरीक्षण & ज्ञान से उत्पन्न योग्यता)

3) अभ्यास (अर्जित)

  • K.C. Pandey – the power of clear visualisation of the aesthetic image in all its fullness and life is technically called प्रतिभा
  • पाश्चात्य विद्वान:      1) Wordsworth – कल्पना एक मानसिक कौशल है। 

2) विश्वकोश – कल्पना वह मनसिक शक्ति है जो वस्तुओं की अनुपस्थिति में उन्हें मस्तिष्क

          के  समक्ष प्रस्तुत करती है। 

3) मैक्डूगल – कल्पना अप्रत्यक्ष वस्तुओं के सम्बन्ध में चित्रण मनन है।

4) Coleridge – …… prime agent of perception.

  1. B.  व्युत्त्पति : बहुज्ञता, निपुणता, शास्त्रीय-लौकिक ज्ञान, …
  • दंडी: शास्त्र-ज्ञान
  • रुद्रट: छन्द-शास्त्र, व्याकरण & कला का ज्ञान (निपुणता के लिए)
  • मम्मट: शब्दकोश, शास्त्र, जीवन-शास्त्र का ज्ञान, …
  • राजशेखर: बहुज्ञता व्युत्पत्ति: इत्याचार्या (व्याकरण, लोकवृत्त, महाकवियों के काव्य-इतिहास, पुराण, लक्षण-ग्रंथ … से उत्पन्न ज्ञान)
  1. C.  अभ्यास (पूर्व-वासना-जन्य अद्भुत प्रतिभा के न रहने पर भी शास्त्राध्ययन और अभ्यास से वाणी की उपासना करने पर वाणी अवश्य ही अनुग्रह करती है।)

K. Goodary

21 Oct 2011

 

NOTE: KINDLY NOTE THAT WE NEED ADDITIONAL CLASSES TO CATCH UP WITH OUR MODULE MAP. PLEASE DISCUSS IT AMONG YOURSELVES, ESPECIALLY WITH JOINT HONS STUDENTS FOR FREE SLOTS WHERE WE CAN MEET UP. 

धन्यवाद.

 

 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

One Response to BA Yr 1 FT: Lecture 8 – काव्य हेतु (पृष्ठभूमि)

  1. Ujoodha Priya says:

    गुरुवार को हमने बहुत मस्ती की….
    तथा दूसरे विषयों के छात्रों से घुलमिल गए…
    कक्षा में काव्य हेतु,काव्य लक्षण तथा काव्य प्रयोजन के बीच अंतर ज्ञात हुआ.. काव्य हेतु के बारे में आप ने थोरा प्रकाश डाला..

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: