BA Yr 2 FT: Lecture 9 – “पराजय” का विश्लेषण / व्याख्या + “समस्या” का प्रस्तुतीकरण

Tuesday 25 Oct 2011, 9.30 – 11.30, BA Yr 2 FT, Mauritian Hindi Literature

 

नमस्कार.

“पराजय” कहानी की सार्थकता पर आज  चर्चा  की गई. शीर्षक़  का विश्लेषण किया गया. साथ ही दो-तीन दृष्टिकोणों के आधार पर इसकी आलोचना की गई.

कहानी का तत्कालीन संदर्भ, समकालीन परिस्थितियाँ तथा अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में इस कहानी की क्या भूमिका है, इन पर प्रकाश डाला गया.

बलराज असल में एक प्रगतिशील पात्र है, जो अधिकारों के लिए लड़ता है, वह हार कर  भी जीतता है क्योंकि ऐसे ही पात्रों के आधार पर युग-निर्माण होता है, इन्हें युग-पुरुष भी कहा जा सकता है. ऐसे लोगों को अनेक समस्याएँ झेलनी पड़ती है, अनेक विरोधों का सामना करना होता  है, इसलिए सारे विरोधी तत्व इनके खिलाफ खूमते हुए नज़र आते हैं, इस कहानी में भी यही स्मस्या है.

शेष विस्तार से समझाया गया. लेखक की काव्यात्मक शैली, उनके भाषिक प्रयोग, बिम्बात्मक प्रयोग आदि इस कहानी के वातावरण-निर्माण में चार चांद लगा देते हैं.

पूँजीवादी व्यवस्था में पनप रहे राजनीतिक मानसिकता तथा सरकारी संस्थाओं को अपने जागिर समझते हुए साधारण जनता पर शोषण करने वाले आधुनिक शोषकों पर कटाक्ष करती हुई यह कहानी विषयगत दृष्टि से अत्यंत सशक्त है.

कक्षा के दूसरे हिस्से में खुशबू, जयवीणा और मनीषा द्वारा सोनालाल नेमधारी कृत “समस्या” कहानी पर प्रस्तुतीकरण रहा. तीनों ने सराहनीय प्रयास किया परंतु कुछ त्रुटियाँ भी रहीं. तकनीकी समस्याओं के अतिरिक्त समय नियोजन, आप्स में सही संयोजन तथा भाषा-प्रयोग को आसानी से अभ्यास के आधार पर मिटाए जा सकते थे. बहरहाल, उनकी आलोचनात्मक शैली बहुत ही प्रशंसनीय रही.

NOTE:

  1. kindly come prepared after reading the short story “samasyayein” in our next class.
  2. also, note that we are not having a class on next Tuesday as it is a public holiday. the class will definitely be replaced later.
  3. in my next class, I’ll analyse the short story samasyayein.
  4. in the class after that we shall be having a class test, so start your revision as from now itself.
दीपावली की मंगलकामनाएँ सभी को..

 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

4 Responses to BA Yr 2 FT: Lecture 9 – “पराजय” का विश्लेषण / व्याख्या + “समस्या” का प्रस्तुतीकरण

  1. Trishila says:

    आज पराजय कहानी पर विस्तार दिया गया l पराजय कहानी में मुझे लगता है की मुख्या पात्र बलराज हारकर भी जीत गया क्योंकि वह अपने अधिकारों हेतु संघर्ष कर रहा था l पराजय कहानी में स्थानीय परिवेश तथा समकालीन परिवेश को दर्शाया गया हैl बलराज ने जो संघर्ष की चिंगारी जलाई है उस अन्याय को देखकर हर व्यक्ति के ह्रदय में वह चिंगारी जल गयी हैl आज समस्या कहानी पर भी प्रस्तुतीकरण हुवा l वह बहुत अच्छा था I पर्यटक जो यहाँ घुमने आते है अपनी संस्कृति भी साथ लेट हैल उमा के पिताजी रतनलाल यहाँ नहीं चाहते थे की उन संस्कृतियों का असर उनकी बेटी पर परे इसीलिए वहां से चले जाते हैl हमें यहाँ पता चलता है की उन पर्यटकों की संस्कृति और हमारी संस्कृति कितनी अलग हैI

  2. Rishika says:

    आज पराजय कहानी पर विश्लेषण हुवा. हमें पता चला की आलोचना केसे किया जाता है.बलराज का सेय्धान्तिक और उसकी पत्नी का व्यावहारिक होना इन दोनों में एक उलझन सी होती है. समस्या कहानी पर प्रस्तुतीकरण हुवा.शीर्षक भी बहुत गंभीर है. रतनलाल अपनी बेटी को लेकर पहार पर रहने चला जाता है. योगेश उमा से प्रेम करता है किन्तु रतनलाल से नहीं बोल पट. मुझे व्यक्तिगत से यह लगता अहि की रतनलाल अपनी बेटी के प्रति बहुत overprotective है क्योंकि वह नहीं चाहता की उन पर्यटकों से उसकी बेटी प्रभावित हो.

  3. bundhoo.goshena says:

    जैसे की त्रिशीला ने बताया पराजय कहानी में बलराज़ की हार नहीं हुई बल्कि जीत हुई है क्योंकि मेरा मानना है कि प्रयत्न करना ही अपने आप में प्रशंसनीय है और जीत का प्रतीक है|बलराज जो आधुनिकता एवं साधारण मनुष्य का प्रतिनिधित्व करता है वह व्यवहारिक न होकर तथा दूसरों के हित के बारे में सोचता है|कायरता दिखाने के बजाय परिस्तिथियों का सामना करता है और यह बात सब को जाता है कि चाहे परिस्तिथि कितना भी कठिन हो इसे आत्मविश्वास के साथ सामना करनी चाहिए, चाहे परिणाम अच्छा हो या बुरा|जैसे की हम जानते हैं कि हर समस्या का हल होता है| मेरा यह मानना है कि व्यापार में बदलाव लानी चाहिए और न की एक ही उत्पाद करना चाहिए|व्यापार का विस्तार ज़रूरी है ताकि बाद में उद्योग की हानि न हो जैसे चाय उद्योग का हुआ|इस कहानी में कह सकते हैं कि न मलिक को ज़िम्मेदार ठहरा सकते हैं न की मज़दूर को क्योंकि परिस्तिथि ने ही उन्हें इस मोर पर ले आये|

  4. Deepika says:

    पराजय कहानी एक रोचक कहानी है जहाँ हम संघर्ष, विद्रोह की भावना मिलते है, और इस कहानी में हम स्वतंत्र पर एक प्रश्न चिन्य लगा सकते है क्योकि पराजय में देखा जाए की शोषण अभी तक हो रहा है!लोह अपने अपने अधिकार नहीं मिल रहे है!लेकिन एक कहानी को कई दृष्टि से देखना चाहिए !
    जैसे इस कहानी को अगर कई दृष्टि से देखा जाए तो में यहाँ कह सकती हूँ की इस कहानी में किस्सी का कोई दोष नहीं है!
    और में यह कहना चाहती हु की हमे हर एक पत्र क नज़र से देखना चाहिए!
    यहाँ देखना चाहिए यह स्थिति ऐसी क्यूँ है!
    एक ही वर्ग को दोषी ठहरा नहीं जा सकता और गुरूजी विनय को धन्यवाद I

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