BA Yr 3: Lecture 5 – अनुवाद की प्रक्रिया

Thursday 27 Oct 2011, 08.00-09.30, BA Yr 3, Media & Translation Studies

नमस्कार,

अपने पाठ्यक्रम के साथ हम काफी लेट है… मुझे कुछ अतिरिक्त कक्षाएँ आपसे चाहिए, कृपया जोईंट वालों के साथ सही संयोजन करके मुझे सूचित करें..

अनुवाद की प्रक्रिया के संबंध में कुछ विशेष बिन्दु: –

  • अनुवाद एक परकाय-प्रवेश की प्रक्रिया है
  • अनुवाद: अर्थ- संप्रेषण की प्रक्रिया में (संभावित / उपयुक्त प्रतीकों का चयन)
  • सांस्कृतिक संदर्भ के एकीकरण के रूप में (unification of cultural contexts) – साहचर्य का संबंध
  • व्याख्या के रूप में / व्याख्यात्मक अंतरण
  • भाषा के विभिन्न स्तरों पर पाठ्य-सामग्री के प्रतिस्थापन के रूप में
  • अर्थ एवं शैली की समतुल्यता के रूप में
  • समंवय / अभिव्यक्ति का विस्थापन shift of expression
अनुवाद की प्रक्रिया इस प्रकार है: –
  1. मूल पाठ
  2. समंवयन (अनुवाद की कार्यनीति का निर्धारण)
  3. विश्लेषण
  4. बोधन
  5. पारिभाषिक अभिव्यक्ति
  6. पुनर्गठन
  7. पुनरीक्षण (अनूदित पाठ की पूरी जांच, व्याकरण सम्मतता, परिष्करण, श्रुति मधुरता, प्रवाह, स्पष्तता, सहजता, उपयुक्तता …)
  8. संशोधन
  9. पर्यालोचन (विषय-विशेषज्ञ)
  10. लक्ष्य भाषा पाठ
NOTE:
  • next Lecture on अनुवाद की प्रकृति { please come prepared}
  • we shall probably work on a text for translation in class next time..
  • I am still waiting for your classwork of the translated work (“Translation is an Art).
  • we need to catch up with our lateness, please arrange with Joint students for additional classes
धन्यवाद
विनय

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

5 Responses to BA Yr 3: Lecture 5 – अनुवाद की प्रक्रिया

  1. Pratima Dookhit says:

    अनुवाद में हर एक शब्द अर्थ का प्रतीक है| पार्थिव वस्तु का अर्थ प्रतीकात्मक है| हर एक भाषा की अपनी सीमाएँ होती है| भाषिक सौहाद्र्य के नाते, सभी भाषाआँ को जानना चाहिए| अनुवाद दो संस्कृतियाँ के मिलन का काम करता है जब भाव, प्रभाव, विचार आदि एक ही प्रवाह में होते हैं| हम अपनी भावनाआँ को एक शब्द, एक वाक्यांश या एक वाक्य में व्यक्त कर सकते हैं| अनुवाद करते समय, बातों को किस शैली तथा किस अन्दाज्ञ में कहा गया है, उसे ध्यान में रखकर, लक्ष्य भाषा में परिवर्तित करना है|

  2. Reshmee Gokhool says:

    अनुवाद प्रतीकों के बिना सम्भव नहीं है। जिस प्रकार हर भाषा की अपनी प्रतीक होती है उसी प्रकार अनुवद करते समय अनुवादक को यह ध्यान में रखना चाहिये कि स्रोत भाषा के भाव, अर्थ एवं आत्मा को भी साथ लेकर प्रतीकों सहित लक्षय भाषा तक पहुঁचाए। यह अत्यन्त आवश्यक है कि अनुवादक इन प्रतीकों के ह्रदय में जाए, समझें तब अनुवाद करे तभी वह एक श्रेष्ठ अनुवाद कहलाएगा ।

  3. ghoora taruna says:

    किसी भाषा के भाव या विचार को दूसरी भाषा में अनुवाद करते समय कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है| अनुवाद करते समय दो भाषाओँ के बीच अर्थ सम्प्रेषण होती है| अनुवाद में प्रतीकों का बड़ा महत्व होता है, जो भाषा में एक अद्भुत तत्व लाता है| प्रायः हर भाषा में प्रतीक की अनिवार्यता होती है जिसके बिना भाषा लगभग अधूरी होती है| अनुवाद करते समय अनुवादक को प्रतीकों को समझना चाहिए और फिर विश्लेषण करके अनुवाद करनी चाहिए| प्रायः यह माना जाता है कि शब्द कि आत्मा तो उसके प्रतीकात्मक रूप में ही छिपी रहती है| अतः अनुवाद में प्रतीकों के प्रयोग से वही प्रभाव पाठक पाठक पर पड़ता है, जो प्रभाव प्रायः मूल पाठमें रहा होगा| अनुवाद करते समय न केवल दो भाषाओँ में सम्प्रेषण होती है अपितु दो संस्कृतियों में एकीकरण स्थापित होती है| साथ ही साथ दो भाषाओँ में ज्ञान का वितरण होता है| अनुवादक को मूल पाठ की शैली को भी ध्यान में रखते हुए अनुवाद करनी चाहिय ताकि उसमें वही प्रवाहमयता हो|

  4. Beeharry kavina devi says:

    अनुवाद की प्रक्रिया में अनेक स्तर होते हैं जैसे कि मूल पाठ,समवयन,विश्लेषण,बोधन,पारिभाषिक अभिव्यक्ति,पुनर्गठन,पुनरीक्षण,पर्यालोचन,लक्ष्य भाषा |

  5. Devi Ramsing says:

    अनुवाद करने के लिए अनुवादक को कुछ प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए | पहले अनुवादक को मूल सामग्री को पढ़ कर उसके भाषिक अर्थ समझना पड़ता है जिसे उसे कोष की सहायता लेनी पड़ती है | इसके बाद पाठ का विश्लेषण आता है जिसके अंतर्गत अनुवादक शब्दों एवं वाक्यों पर निशान लगाता है |पाठ विश्लेषण के पश्चात् स्रोत भाषा के इकाइयों को लक्ष्य भाषा के इकाइयों में शब्द का अंतरण करते हैं |पाठ की कठिन स्थितियों समझकर लिखना शुरू करें |यहाँ आकर जो अनुवाद का लक्ष्य भाषा की दृष्टि से समायोजन करते हैं |समायोजन के अंतर्गत तीन बातें अनिवार्य है :भाषा में सहज प्रवाह हो ,लक्ष्य भाषा में स्रोत भाषा की छाया न हो, अर्थ स्पष्ट हो | अंतिम चरण में अनुवादक को मूल रचना से एक बार अवश्य तुलना करनी चाहिए |

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