Lecture 10 – समस्या का विश्लेषण

Tuesday 08 Nov 2011, BA FT Year 2, 10.45 – 11.15 a.m

As I told you all last week, I had a rendez vous today at the hospital. I managed to come by the time the class was almost over by Mr Bissessur.

Even though, I had a brief session with you on the short story समस्या …

यह कहानी तत्कालीन सामाजिक यथार्थ को चित्रित करने में सफल है जहाँ मॉरीशस के सामाजिक ढाँचे में परिवर्तन हो रहा था. यह एक वास्तविकता है कि किसी भी सामाजिक संरचना में बदलाव के कारण अनेक असुविधाएँ उत्पन्न होती हैं. साथ ही नई परिस्थितियों के साथ संबंध जोड़ने तथा समझौता करने में समय लगता है. वस्तुत:  “असुरक्षा” वाले भावबोध के उत्पन्न होने की आशंका सदा रहती है.

विचारक मानते हैं कि नई परिस्थितियों की उपस्थिति से प्राय: मनुष्य 2 प्रकार के कदम उठाते हैं जिसके आधार पर 3 वर्ग के लोग सामने आते हैं जो इस प्रकार हैं: –

  1. इनके साथ समझौता करने वाले लोग
  2. इनसे पलायन करने वाले लोग
  3. इनका विरोध करने वाले लोग

आलोच्य कहानी का रतनलाल दूसरे वर्ग वाले लोगों के अंतर्गत आता है. समुद्र तट पर पनप रही पर्यटन संबंधी “विदेशी” संस्कृति से रतनलाल भयभीत होकर अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए पहाड़ पर रहने जाता है. यह व्यवहार तत्कालीन परिप्रेक्ष्य में एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी क्योंकि अपनी सांस्कृतिक धरोहरों की नींव को झकझोरने के लिए इस आयातित संस्कृति से उन्हें असुरक्षा की अनुभूति हो रही थी.

दूसरी बात, यह कहानी स्थापित परिभाषाओं के पुनर्मूल्यांकन पर जोर देती है. जैसे कि – प्रगतिशीलता, आधुनिकता बोध, विकसित समाज आदि.

हालांकि इस कहानी के अभिव्यक्ति पक्ष में कुछ न्यूनताएँ देखी जा सकती हैं परंतु विषयवस्तु की दृष्टि से यह कहानी उस समय के सामाजिक यथार्थ को प्रदर्शित करने में पूरी तरह सक्षम रही. उस समय की वह  असामान्य स्थिति  आज सामान्य बनकर  देश के लिए विदेशी मुद्राओं  की प्राप्ति  के लिए एक विशेष  व महत्वपूर्ण स्रोत बन गई है.

तब भी प्रगति का वास्तविक अर्थ मूल्यों + आर्थिक विकास के संतुलित रूप  में ही निहित है.  इस दिशा में  भी प्रस्तुत  कहानी  की  आलोचना  की  जा  सकता  है.

प्रकृति की स्वाभाविकता को  भी एक  सशक्त संदेश  के  रूप  में  लेखक  ने  प्रस्तुत  किया. प्रकृति  के  इसी रूप के  आधार  पर  अंत  में  उमा और  योगेश  का  प्राकृतिक  संबंध  जुड़ता  हुआ  नज़र  आता  है.

असुरक्षा  वाले  इस  वातावरण  में  सुरक्षा  के  इसी  भाव-बोध  के  साथ लेखक  इसकी  चरम-सीमा  को  हमारे  सामने  रखते  हुए  हमें  अनेक  प्रश्नों  के  बंधन  में  बाँधते  हुए  अपनी  लेखनी  को  विराम  देता है.

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

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