Lecture 10 – “तब समझूँगा आया बसंत” की व्याख्या

Monday 07 Nov 2011, MA Yr 1, 16.00-17.30

स्वागतम.

इस क्लास में मैंने माखनलाल चतुर्वेदी कृत “अमर राष्ट्र” की व्याख्या पूरी की.

साथ ही पिछले सप्ताह आपको 4 कविताओं की व्याख्या पर एक काम दिया था, इस बार कुछ ही लोग यह पूरा कर पाए..

कक्षा में आपने इस क्रम की प्रथम कविता का विश्लेषण किया, इस कविता पर हर किसी ने टिप्पणी की. जहाँ समानता जैसे कुछ लोगों ने इस कविता की मूल संवेदना को विश्व युद्ध के साथ जोड़ा वहाँ अन्यों ने इसका अभिधात्मक विश्लेषण किया.

इस कविता को समझाते हुए मुझे आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का एक निबंध याद आता है जहाँ अंत में वे लिखते हैं कि ‘वसंत आता नहीं, लाया जाता है… जो जहाँ चाहे, जब चाहे, उसे ला सकता है…’ पंक्ति संभवत: पूरी तरह से सही न हों पर विचार यही है जो लगभग इस कविता में व्यक्त हुए है.

यह कविता स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में लिखी गई ऊर्जामय कविता तो है ही जहाँ सुप्तावस्था में पड़ी भारतीय जनता को जगृत किया जा रहा है साथ ही उनके जीवन की सार्थकता को भी दिशा दी जा रही है. साधारण शैली में लिखी गई, इस कविता के हरेक चरण में दो तुलनात्मक बिम्ब प्रस्तुत है जो एक दूसरे के नितांत विरोध में है और जिनके बीच से यह पंक्ति हरेक चरण के अंत में निकलती है “तब समझूँगा आया बसंत” …

प्रथम बिम्ब में ‘बसंती माहौल/ गीत/ जौहर & नवयुवकों की छाती जो तोप को सहर्ष स्वागत करने के लिए तैयार है.

दूसरे में, पतझड़ & ‘विकसित कोंपल-कर में’ …

तीसरे में, पीड़ित मानवता & अपनी धरती – वन-उपवन का दृश्य है.

चौथे में, विश्व-प्रेम & उपवन में हरियाली ..

अंत में परवशता & माँ की झोली का बिम्ब है.

इस कविता में शुक्ल जी के विरुद्धों का सामनजस्य भी दिखाई देता है.

NOTE:

Next time, we shall complete the other remaining 3 poems. Please come prepared.

PLEASE TAKE NOTE THAT I AM NOT TAKING MY CLASS ON MONDAY 14 NOV 2011. 

THE CLASS WILL BE REPLACED LATER. WE CAN CONSIDER THE OPTION OF WEDNESDAYS ALSO (16.00-17.30). 

 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

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