Lecture 11 & 12 – “समस्या” कहानी पर प्रस्तुतीकरण & विश्लेषण

Saturday 05 Nov 2011, BA PT Yr 1, 12.30 – 15.00. 

सभी को नमस्कार.

आज मैंने अर्विंद जी की भी क्लास ली. अर्थात हमारी दो कक्षाएँ लगीं.

पहले भाग में Divya Teeluck का प्रस्तुतीकरण “समस्या” कहानी पर आधारित रहा.

दूसरे भाग में मैंने कहानी की व्याख्या तथा आलोचनात्मक परिचय दिया.

करीब 20 मिनट के प्रस्तुतीकरण में दिव्या ने कहानी की समग्र आलोचना की. शीर्षक की सार्थकता पर विस्तार देते हुए, लेखक का परिचय, तात्विक विवेचना, sustainable development के परिप्रेक्ष्य में कहानी की सार्थकता, आदि ऐसे अनेक पहलुओं की चर्चा करते हुए दिव्या ने अपनी आलोचनात्मक शक्ति प्रदर्शित की. अंत में प्रश्नोत्तर वाले सत्र में उसने बखूबी व स्पष्ट ढंग से अपने विचारों को कक्षा के समक्ष रखा. इस बात पर मुझे लगता है सभी सहमत होंगे. परंतु, उसकी अभिव्यक्ति में तथा टंकण संबंधी कुछ त्रुटियाँ रह गईं जिन्हें सुधारी जा सकती थीं. बहरहाल, एक बहुत ही चिंतनशील व गंभीर प्रस्तुतीकरण रहा जिसके आधार पर हम सभी का ज्ञान-वर्द्धन हुआ.

अपने विश्लेषण में, मैंने दिव्या द्वारा उठाए गए तर्कों पर विस्तार दिया. आज के परिप्रेक्ष्य में ऐसी कहानियों की सार्थकता, उनकी उपादेयता, उनकी महत्ता आदि पर चर्चा करते हुए, सामाजिक-आर्थिक विकास तथा मूल्यगत विकास के बीच संतुलन की मांग करने वाली इस कहानी का विश्लेषण किया. इस दृष्टि से प्रगतिशीलता, आधुनिकता बोध, जैसी अवधारणाओं की पुनर्परिभाषा पर ज़ोर देने वाली यह कहानी मॉरीशस सामाजिक यथार्थ के चित्र हमारे सामने रखती है. उस समय जब पर्यटन उद्योग का प्रारंभ हो रहा था जिसकी वजह से मॉरीशस का सामाजिक ढाँचा बदल रहा था, आम जनता, साधारण लोगों के मन में असुरक्षा भाव का उदय एक स्वाभाविक स्थिति थी. इसी दृष्टि से कहानी की आलोचना की जाने चाहिए.

चूँकि साहित्य का बेहतर अध्ययन समाजशास्त्र को केंद्र में रखते हुए सार्थक सिद्ध होता है इसलिए इस कहानी में दर्शाए गए मॉरीशसीय पहलुओं (राविनाल, कोयला, बम्बू आदि) के आने से यह और अधिक सफल बन जाती है.

हाँ, इस कहानी की मुख्य कमज़ोरी उसकी भाषा है जिसमें मॉरीशसीयता दिखाई तो देती है परंतु उसमें वैविध्य प्रयोग का अभाव है. साथ ही शैली भी अधिक आकर्षक बनाई जा सकती थी.

मूलत: विचार व विषयवस्तु की दृष्टि से यह कहानी एक सार्थक कहानी है.

NOTE:

I am not taking my class next week, i.e. on Sat 12 Nov 2011, as I replaced it today. Guruji Bissessur will take my slot. 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

7 Responses to Lecture 11 & 12 – “समस्या” कहानी पर प्रस्तुतीकरण & विश्लेषण

  1. प्रेमा says:

    नमस्ते गुरुजी
    सब से पहले दिव्या को बधाइ कि उस ने अकेले यह प्रसतुतिकरण किया/ आप ने विश्लेषण करते समय कुछ ऎसे तत्व सामने रखे जिस की चर्चा नही हुइ थी/ वैसे समस्या उत्नी गम्भीर नही थी जितना कहानी पढ़ने से पहले सोचा था / कहानी मे उस समय का यथार्थ चित्र को हमारे सामने रखा गया हे/

  2. “हड़ताल अवैध है, माँगें अवैध हैं, गरीबी अवैध है, गरीब जन्म लेना भी अवैध है,
    केवल सहना वैध है│”

    प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी कथा साहित्य जगत के प्रसिद्ध कहानीकार पुजानन्द नेमा के समस्याप्रधान कहानी ‘पराजय’ से उद्धृत है। यह गधांश ‘वसंत चयनिका’ पुस्तक में संकलित है इस कहानी में पुजानन्द नेमा जी ने पराजय से लोगों की मानसिक संघर्ष तथा मॉरीशसीय समाज को प्रस्तु्त किया है।

    संदर्भ: ऊपयुक्त गद्यांश ‘पराजय’ कहानी के अन्तिम चरण के अन्तर्गत आता है, यहाँ पर कहानीकार मज़दूरों की पराजय को जीत में समझते हैं और मज़दूर दोस्त अपनी माँग को पुरा नहीं कर पाते हैं। हड़ताल करते हैं पर इस का कोइ असर मिल-मालिकों पर नहीं पड़ता है। यह कहानी के चरम बिन्दु को स्पर्श करता है। ‘पराजय’ कहानी को सम्पूर्ण रुप से इस वाक्य से द्रष्टव्य किया जा सकता है।

    अर्थ : कहानी के अन्तर्गत हड़ताल करना तथा अपनी मांगों के लिये कुछ भी कर जाना उचित नहीं माना जाता है, यहाँ तक कि दीन होना भी पाप के समान है और निर्धन के यहाँ जन्म लेना भी पाप है। अन्तत: केवल पुंजिपति द्वारा शोषित होना ही सही माना गया है।

    भाव : उपर्युक्त पंक्तियों में कहानी की समस्त समस्याएँ सामने आती हैं। चाय की खेती के मिल-मालिकों को हानि सहना पड़ रहा था, इससे कई मज़दूर बेरोज़गार हो चुके थे। आर्थिक संकटें चरम सीमा तक पहुँच गई थी। मज़दूरों के हित के बारे में सोचना केवल मालिकों के आधिकर मे न था क्योंकि यह तो अर्थशास्त्र पर निर्भर था। दूसरी ओर पुंजिपति केवल अपने मुनाफ़े के बारे मे सोचते हैं और गरीबों के अधिकारों का हनन करते हैं। पैसों के माध्यम से वे गरीबों पर शोषण करते हैं। इतना ही नहीं बल्कि राजनेताओं, श्रमिक संघों, पुलिस आदि को खरीद लेते हैं। जहाँ पुलीस जनता की रक्षक का काम करने के लिए हैं वे ही जनता के भक्षक बन जाते हैं और मिल-मालिकों से अपनी जेब भरते हैं। अन्ततः सामान्य जनता का मानना है कि हड़ताल करना, अपनी मांगों की पूर्ति करना तथा गरीब होना, यह सब गैर-कानूनी है पर इन सब को सहना उचित है।

    विशेष:-
    इन पंक्तियों में कहानीकार ने तीव्र रूप से पुंजिपति वर्ग पर व्यंग्य कसा है।
    -गरीब का जीवन नर्क से बद्तर बन गया है, जहाँ इसे अपने भाग्य से जूझना ही लिखा है।
    -प्रासंगिकता: आधुनिक युग में भी अपनी अपनी मांगों को पूरा करने हेतु मज़दूर हड़ताल करते हैं।
    -मिश्रित भाषा का प्रयोग हुआ है।
    तत्सम् शब्द: अवैध, वैध
    तद्भव शब्द: गरीबी, जन्म
    उर्दू शब्द: हड़ताल

    शैली
    वर्णनात्मक शैली का प्रयोग हुआ है।
    व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग हुआ है।
    ________________________________________

  3. sarika says:

    दिव्या की प्रर्स्तुतीकरण अच्छी रही और आशा है कि हमारे प्रश्न भी स्वभादिक थे । इस कहानी मैं अनेक ऐसे तत्व है जो प्रसंगीक है पर आजकल विदेशियों से देश को बहुत लाभ हो रहा है । कहानी मे उस समय का यथार्थ चित्र को हमारे सामने रखा गया हे पर आज का समाज उस समय के समाज से कुछ अलग दिखाई देती है। समस्या उत्नी गम्भीर नही थी जितना कहानी पढ़ने से पहले सोचा था ।

  4. siddhi says:

    नमस्ते गुरूजी
    पिछले सप्ताह दिव्या ने अपनी प्रस्तुतिकरण में समस्या कहानी का विश्लेषण किया मैं उसे बधाई देना चाहती हूँ अकेले काम करना आसान नहीं है
    टंकन में कुछ गलतियों थी और कुछ लोगों का विचार दिव्या से अलग थी और मै सो्चझती हूँ कि हमारे विचार से वह भी सहमत होगी

  5. divya teeluck says:

    नमस्ते गुरुजी मुझे आशा है कि मै हमेशा आपकी उन्मीदों पर खडी उतरुगी। अभी भी टंकण की समस्या जारी है।आप ने मेरे प्रस्तुतिकरण को सलाहा धन्यवाद है और प्रेम तथा सारिका को भी|आपकी बातों को मै ध्यान म रखूंगी।

  6. divya teeluck says:

    सिद्धी को भी धन्यवाद है।

  7. Sunaina Joypaul says:

    नमस्ते गुरुजी,
    गत सपताह कक्शा मे न आने के लिये शमा| तबीयत कुछ थीक नहीं है….. क्षमा करें…|सब से पहले दिव्या को बधाइ कि उस ने अकेले यह प्रसतुतिकरण किया|
    धन्यवाद गुरुजी

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