Lecture 7 & Lecture 8 – अनुवाद की प्रकृति (कला, शिल्प अथवा विज्ञान)

Thursday 17 Nov 2011, 09.00 – 11.00 a.m.

Dear students,

since we are quite late with our syllabus, i propose we extend some classes after the end of this semester, i.e. during the holidays. I talked about this in class and you all seem to agree with the idea.

I further reiterate that you should continue to check http://www.evidya.org for further details, and otehr related materials.

आज की कक्षा में हमने अनुवाद की प्रकृति की चर्चा की. आरंभ में आपको यह बताया गया कि मानव प्रतिभावान मूलत: अपने पूर्व-जन्म के संस्कारों के द्वारा बनता है. इसपर संस्कृत के आचार्यों ने विस्तार से समझाया विशेषकर काव्य-हेतु के संदर्भ में. If you need more details about this, kindly go to the module contents of BA Yr 1, Literary Theory & Forms of Literature. यही कवि के मन में कलात्मकता का संचार करती है, इसी को प्रतिभा, शक्ति, दीप्ति, कलपना-शक्ति आदि नामों से संबोधित किया गया.

अब प्रश्न यह है कि क्या अनुवाद एक कला है? आपको कक्षा में इस संदर्भ में अनेक उदाहरण दिए..

मूल बात यह है कि अनुवाद  न तो विशुद्ध कला है, न विशुद्ध शिल्प है और न ही विशुद्ध विज्ञान है.

Muir जैसे विचारकों के अनेक परिभाषाएँ देते हुए यह सिद्ध किया है कि अनुवाद एक “द्वितीयक” या “गौण” कला है. secondary art.. और इस रूप में यह प्रमाणित किया कि “साहित्यिक अनुवाद” में ही इस कला का दर्शन मिलता है. जहाँ पर किसी कविता के अनुवाद में अनुवादक के पास कवि-मन का होना अनिवार्य है.

शिल्प और कला एक दूसरे से जुड़े हुए है. दोनों प्राय: साथ साथ चलते है. शिल्प को technique कहा गया. अनुवाद वास्तव में एक शिल्प भी है…परंतु इसके पीछे कुछ शर्तें हैं…जिन्हें अगले सप्ताह समझाऊँगा..

 

About Vinaye Goodary
senior lecturer in Hindi at the Mahatma Gandhi Institute, moka, mauritius. innovative in teaching using ICT, blogs and multimedia resources. interest in arts, culture, history and literature. शेष तो मैं ही मैं हूँ... स्वागत है.

5 Responses to Lecture 7 & Lecture 8 – अनुवाद की प्रकृति (कला, शिल्प अथवा विज्ञान)

  1. ghoora taruna says:

    अनुवाद के लिए भाषिक संरचना, ज्ञान, शिल्प आदि की आवश्यकता पड़ती है| प्रायः कवी भावों में बहते हुए काव्य रचना करता है, परन्तु अनुवादक के साथ ऐसी कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि अनुवादक अनुवाद करते समय किसी भाव का रूपांतरण करता है| अनुवाद कला, शिल्प एवं विज्ञान का सम्मिश्रण है| जैसे कि हरेक व्यक्ति की अपनी प्रतिभा होती है तो अलग-अलग व्यक्ति विभिन्न ढंग से एक अनुवाद करते है| अनुवाद शुद्ध रूप में कला नहीं है क्योंकि कला में तो व्यक्ति के व्यक्तित्व की छाप होती है| अनुवाद करते समय अनुवादक को एक प्रक्रिया का अनुकरण करना पड़ता है| मूल पथ के भावों को रूपांतरित करने के लिए अनुवादक को एक प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ती है| अतः शिल्प के माध्यम से ही वह उस भाव की अभिव्यक्ति कर पाता है|

  2. Devi Ramsing says:

    अनुवाद के सन्दर्भ में यह प्रश्न अवश्य उत्पन्न होती है कि अनुवाद कला ,शिल्प या विज्ञान है | वास्तव में अनुवाद शुद्ध रूप से न तो कला ,शिल्प या विज्ञान है | Edwin Muir के अनुसार अनुवाद एक द्वितीयक कला है | अनुवादक को हर क्षेत्र का ज्ञान होना चाहिए | कला और शिल्प में गहरा सम्बन्ध है |दोनों सृजनात्मकता के आधार पर जुड़े हुए है | कला में आत्मभिव्यक्ति की प्रधानता है जबकि शिल्प स्थिति से जुरा हुआ है |

  3. Pratima Dookhit says:

    अनुवाद के लिए अभ्यास महत्वपूर्ण है अर्थात ज्ञान, भाषिक संरचना की जानकारी, शिल्प की आवश्यकता होती है| कला में कवि का व्यक्तित्व आ जाता है, व्यक्तित्व संचारित होता है क्योंकि वह आत्माभिव्यक्ति करता है| अनुवाद में एक प्रक्रिया का अनुकरण करना चाहिए| शिल्प में व्यक्ति का महत्व उतना नहीं जितना प्रक्रिया का महत्व है| कला और शिल्प एक दूसरे से जूड़े होते हैं, कुछ भी करने से पहले व्यक्ति सोचता है जो कि कलात्मकता के आधार पर होता है| शिल्प लेखन से तात्पर्य है, भावनाआँ तथा विचारों को शब्दों में लाना| अनुवाद एक शिल्पगत कला एवं एक कलात्मक शिल्प माना जाता है|

  4. Reshmee Gokhool says:

    अनुवाद में एक प्रक्रिया का अनुकरण किया जाता है । इस आधार पर यह कहना अनुचित नहीं होगा कि कला और शिल्प में एक गहरा सम्बन्ध है। दोनों एक दुसरे से जुड़े हुए हैं । पर प्रतिभाएঁ हर व्यक्ति के अन्दर अलग अलग रुप में है, यही कारण है कि अनुवाद शुध्द रुप में कला नहीं है। उसी प्रकर कुछ बनाने के लिए सृजनात्मकता की आवश्यकता होती है । उस भाव को प्रकट करने के लिए शिल्प की आवश्यकता है । इसीलिए अनुवाद को शिल्पगत कल कहा जाता है ।

  5. Diya Lakshmee Bundhun says:

    अनुवाद के लिए प्रशिक्षण,अभ्यास,ज्ञान,भाषिक संरचना की जानकारी तथा शिल्प की आवश्यकता होती है। अनुवाद न विशुद्ध कला है,न विशुद्ध शिल्प है और न विशुद्ध विज्ञान है अर्थात अनुवाद में इन तीनों का सम्मिश्रण है। अनुवाद में एक प्रक्रिया का अनुकरण करना चाहिए। कला व शिल्प में गहरा सम्बन्ध है क्योंकि दोनों एक दूसरे से बन्धे हुए हैं। अनुवाद एक शिल्पगत कला है। Edwin Muir के मतानुसार अनुवाद एक कठिन कला है। यह एक प्रयास है और अपने आप में एक गन्तव्य नहीं हैं। अनुवाद में आदर्श असम्भव है क्योंकि यह एक गौण कला है। अनुवाद तभी सफल होता है जब अनुवादक प्रतिभासम्मपन है- The best translator for literary texts is the one who has an art..

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